चालीसा का पुण्यकाल- 13 : धर्म और ईश्वर से जुड़ने का समय

घटना 14 दिसंबर 2012 की है़ न्यू टाउन, अमेरिका के सैंडी हुक एलेमेन्टरी स्कूल में ऐडम लान्जा नामक एक 20 साल के लड़के ने छह से सात साल के लगभग 20 स्कूली बच्चों को राइफल की गोलियों से भून डाला़ छह स्कूल स्टाफ भी मारे गए. स्कूल आने के कुछ देर पहले ही ऐडम लान्जा […]

घटना 14 दिसंबर 2012 की है़ न्यू टाउन, अमेरिका के सैंडी हुक एलेमेन्टरी स्कूल में ऐडम लान्जा नामक एक 20 साल के लड़के ने छह से सात साल के लगभग 20 स्कूली बच्चों को राइफल की गोलियों से भून डाला़ छह स्कूल स्टाफ भी मारे गए. स्कूल आने के कुछ देर पहले ही ऐडम लान्जा ने अपनी मां को भी गोली मार दी थी़ बच्चों को गोली मारने के बाद उसने खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली.
एक प्रसिद्ध ख्रीस्तीय उपदेशक और वक्ता से जब इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए कहा गया, तो उनका जवाब था- ‘गलती हमारी है़ हमने स्कूलों से धर्म और नैतिक शिक्षा का विषय ही हटा दिया है़ स्कूल-कॉलेजों में धर्म का कोई प्रतीक तक नहीं है़ सभी माता-पिता अपने बच्चों को सेक्युलर विषय जैसे इतिहास, गणित, विज्ञान पढ़ाना चाहते है़ं सभी को डॉक्टर, इंजीनियर बनना है़
इनसान बनना कोई नहीं चाहता़ ऐसे हालात में ऐडम लान्जा जैसा लड़का बनना कोई हैरानी की बात नहीं है़ जब तक ईश्वर और धर्म को हम शिक्षा में शामिल नहीं करेंगे, इस तरह की घटनाएं नहीं रुकेंगी़ चालीसा काल में हम चिंतन करें कि हम ईश्वर से और धर्म से कितना जुड़े है़ं क्या हमारे नैतिक मूल्य हमारे धर्म की सच्चाई से जुड़े हैं? चर्च जाना, बाइबल पढ़ना, पाप स्वीकार संस्कार में भाग लेना आदि ईश्वर से जुड़ने के माध्यम है़ं
फादर अशोक कुजूर, डॉन बॉस्काे यूथ एंड एजुकेशनल सर्विसेज बरियातू के निदेशक

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