रांची : हाइकोर्ट निर्माण : गड़बड़ी की जांच के लिए अब तक नहीं बनी कमेटी

रांची : झारखंड हाइकोर्ट के नये भवन के निर्माण की प्रक्रिया (टेंडर, बिना अनुमति निर्माण, टेंडर के बाद सामग्री में परिवर्तन अादि) में हुई गड़बड़ी की जांच करने के लिए राज्य सरकार ने अब तक कमेटी का गठन नहीं किया है. कमेटी की सिफारिशों और प्रक्रिया में अनियमितता की जांच के लिए कमेटी गठन से […]

रांची : झारखंड हाइकोर्ट के नये भवन के निर्माण की प्रक्रिया (टेंडर, बिना अनुमति निर्माण, टेंडर के बाद सामग्री में परिवर्तन अादि) में हुई गड़बड़ी की जांच करने के लिए राज्य सरकार ने अब तक कमेटी का गठन नहीं किया है. कमेटी की सिफारिशों और प्रक्रिया में अनियमितता की जांच के लिए कमेटी गठन से संबंधित फाइल लगभग तीन महीनों से सरकार के पास लंबित है.

सरकार के स्तर पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है. भवन निर्माण विभाग ने विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति की रिपोर्ट में ‌की गयी अनुशंसाओं पर सरकार से कार्रवाई की अनुमति मांगी थी.

11 सिफारिशें की थी उच्चस्तरीय कमेटी ने : कमेटी ने हाइकाेर्ट भवन निर्माण के 697.32 कराेड़ के पुनरीक्षित इस्टीमेट की प्रशासनिक स्वीकृति के प्रस्ताव काे निरस्त करने, परियाेजना में प्रशासनिक स्वीकृति की सीमा के अंदर कार्य पूरा करा कर कांट्रैक्ट बंद करने की अनुशंसा की थी. कमेटी ने नये कार्याें का फिर से आेपेन टेंडर कराने, 30.91 कराेड़ के काम काे हटा कर मूल निविदा निकालने आैर फिर उसी काम काे उसी ठेकेदार से कराने के दाेषी अफसराें पर कार्रवाई करने की सिफारिश की थी.

कुल 11 सिफारिशों में हाइकाेर्ट भवन निर्माण का काम करा रही ठेका कंपनी रामकृपाल कंस्ट्रक्शन काे लाभ पहुंचाने वाले अभियंताआें पर कार्रवाई भी शामिल थी.
अभियंताओं पर भी कार्रवाई की अनुशंसा की थी : कमेटी ने 366.03 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति को अपनी मर्जी से कम करते हुए 267.66 करोड़ की लागत पर काम पूरा करने के लिए टेंडर करने वाले अभियंताओं पर कार्रवाई की अनुशंसा की थी. टेंडर के बाद रामकृपाल कंस्ट्रक्शन के साथ 264.59 करोड़ में काम पूरा करने का एकरारनामा किया गया. इसके बाद बाकी बची राशि 30.91 करोड़ का काम भी उसे ही दे दिया.
टेंडर के लिए कम किये गये 98.43 करोड़ में से 30.91 करोड़ की राशि निर्माण कार्यों से संबंधित थी. समिति की अनुशंसा के आलोक में 88.17 करोड़ रुपये की फर्निशिंग का काम सरकारी नियमों का उल्लंघन कर उसी ठेकेदार को देने वाले इंजीनियरों पर कार्रवाई की जानी है. मामले में इंजीनियरों की एक समिति का गठन भी प्रस्तावित है. यह समिति वैसे आइटम का रेट निर्धारित करेगी, जिसका उल्लेख बीओक्यू में नहीं किया गया था.

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