रांची : स्वास्थ्य विभाग कोर्ट के आदेश की भी परवाह नहीं करता. समय पर शपथ पत्र दाखिल नहीं करता. कोर्ट द्वारा पूछे जाने पर कर्मचारियों की लापरवाही का हवाला दिया जाता है.
इससे झारखंड हाइकोर्ट नाराज हुआ और कोर्ट के आदेश की प्रति मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव को भी भेजने का निर्देश हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार को दिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य सचिव ने निदेशक प्रमुख को बफ शीट जारी कर विलंब करनेवाले कर्मियों की जिम्मेदारी तय करते हुए रिपोर्ट मांगी है. सचिव ने लिखा है कि झारखंड उच्च न्यायालय ने निदेशालय के स्तर से समय पर प्रतिशपथ पत्र दायर नहीं करने के कारण असंतोष प्रकट किया है.
क्या है मामला : तीन जनवरी को हाइकोर्ट द्वारा रिट पिटीशन नंबर डब्ल्यूपी नंबर 179/2015 की सुनवाई के दौरान विभाग के ऊपर टिप्पणी की गयी थी. कोर्ट द्वारा टिप्पणी की गयी थी कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य सरकार के अफसरों ने महाधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट के आदेश की प्रति मिलने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया.
जब सरकार के अधिकारियों को बुलाया गया, तो जल्द ही शपथ पत्र देने का वायदा किया गया. इसके बावजूद शपथ पत्र दायर नहीं किया गया. कोर्ट द्वारा कहा गया कि प्रतिशपथ पत्र समय पर दाखिल किया जाना चाहिए, ताकि मामले का निष्पादन हो सके. कोर्ट द्वारा आदेश की प्रति मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव तक भी भेजने का निर्देश दिया गया था.
इसके बाद झारखंड हाइकोर्ट के सहायक रजिस्ट्रार कमलेश कुमार सिन्हा ने आदेश की प्रति भेजकर आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया. विभाग के सचिव को जब इस बात की भनक लगी, तो उन्होंने निदेशक प्रमुख को एक बफ शीट जारी कर अविलंब दोषियों को चिह्नित कर कार्रवाई का निर्देश दिया है.
