झारखंड बजट 2019-20 : किसानों को प्रति एकड़ मिलेंगे पांच हजार, बजट का आकार 7231 करोड़ रुपये

वर्ष की तुलना में इस बार कृषि बजट में 24 फीसदी की वृद्धि की गयी वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना की घोषणा कर दी गयी है. इससे करीब 28 लाख किसानों को लाभ मिलेगा. इसके तहत एक एकड़ जमीन रखने वाले किसानों को प्रति एकड़ पांच हजार रुपये दिये जायेंगे. एक […]

वर्ष की तुलना में इस बार कृषि बजट में 24 फीसदी की वृद्धि की गयी
वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना की घोषणा कर दी गयी है. इससे करीब 28 लाख किसानों को लाभ मिलेगा. इसके तहत एक एकड़ जमीन रखने वाले किसानों को प्रति एकड़ पांच हजार रुपये दिये जायेंगे. एक एकड़ से कम जमीन वाले किसानों को भी पांच हजार रुपये नकद दिये जायेंगे. यह राशि प्रति वर्ष दी जायेगी. इ-नैम के तहत सरकार ने किसानों को स्मार्ट फोन देने की घोषणा बजट में की है.
इसके लिए भी 2019-20 के बजट में राशि का प्रावधान किया गया है. राज्य सरकार ने घोषणा की है कि अगले साल भी किसानों को 150 रुपये का बोनस धान की खरीद में दिया जायेगा. वर्तमान में भी सरकार किसानों को समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 150 रुपये बोनस दे रही है.
सिंचाई बढ़ाने के लिए होगी नदी, नाला और तालाबों की सफाई : राज्य सरकार ने आनेवाले वित्तीय वर्ष में सुजलाम-सुफलाम योजना शुरू करने की घोषणा की है. इसके तहत राज्य सरकार एक गैर सरकारी संस्था के सहयोग से नदी, नाला और तालाबों की सफाई करायेगी. इससे इन जल संग्रह क्षेत्रों की जल संधारण की क्षमता बढ़ेगी. इससे सिंचाई की क्षमता विकसित की होगी. इसके लिए सरकार ने भारतीय जैन संगठन से बात की है.
अगले साल भी इजराइल पर अन्य देश जायेंगे किसान : राज्य सरकार ने अानेवाले वित्तीय वर्ष में किसानों को विदेश भेजने की योजना बनायी है. इसके लिए राशि का प्रबंध किया जायेगा. सरकार अगले साल भी किसानों को इजराइल व दूसरे राज्यों में भेजेगी. चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 76 किसानों को राज्य सरकार इजराइल भेज चुकी है. इनको राज्य सरकार ने मास्टर ट्रेनर बनाया है. सभी किसानों को सूक्ष्म सिंचाई योजना से खेती की जानकारी दी गयी है. राज्य सरकार ने आनेवाले वित्तीय वर्ष में भी मीठी क्रांति स्कीम चलाने का निर्णय लिया है.
इसके तहत 12000 किसानों को इस स्कीम से जोड़ा जायेगा. इसके लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान राज्य सरकार करेगी. सरकार ने घोषणा की है कि चालू वित्तीय वर्ष की तर्ज पर अगले साल भी कोल्ड स्टोरेज का निर्माण कराया जायेगा. अभी 30-30 एमटी का कोल्ड स्टोरेज बनाया जा रहा है. अानेवाले वित्तीय वर्ष में खूंटी, सरायकेला-खरसावां, लातेहार, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, धनबाद, दुमका, पाकुड़ व जामताड़ा में कोल्ड स्टोरेज का निर्माण कराया जायेगा. इसकी क्षमता 5000 मीट्रिक टन होगी. 2019-20 में 100 प्रखंडों में कोल्ड रूम निर्माण का लक्ष्य रखा गया है.
पशुपालन-मत्स्य विभाग
टाना भगतों को प्रति परिवार मिलेंगी चार गायें
राज्य सरकार ने आनेवाले वित्तीय वर्ष में भी 641 टाना भगतों के परिवारों को शत प्रतिशत अनुदान पर प्रति परिवार चार गाय देने की घोषणा की है.सरकार ने प्रगतिशील डेयरी कृषकों एवं महिला स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को 50 गाय की कामधेनु डेयरी फार्मिंग योजना देने की घोषणा की है. राज्य की दुधारू गायों के नस्ल सुधार कर उनकी उत्पादकता में वृद्धि के लिए पंचायत स्तर पर कुल तीन हजार कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों की स्थापना का लक्ष्य रखा है. राज्य में गोशालों के माध्यम से प्रगतिशील पशुपालक द्वारा कैटल हॉस्टल की स्थापना प्रस्तावित किया है.
रांची में लगेगा एक मिल्क प्रोडक्ट प्लांट : राज्य सरकार ने रांची स्थित मुख्यालय में एक मिल्क प्रोडक्ट प्लांट लगाने की घोषणा की है. पलामू, देवघर, साहेबगंज, जमशेदपुर एवं गिरिडीह जिले में 50 हजार लीटर क्षमता का डेयरी प्लांट स्थापित किया जायेगा.
80 पोर्टेबल मत्स्य बीज हैचरी का निर्माण होगा : राज्य सरकार ने अगले साल 80 पोर्टेबल मत्स्य हैचरी निर्माण का लक्ष्य रखा है. अभी 59 हैचरी का निर्माण कराया जा रहा है. इससे प्रखंड स्तर पर मत्स्य स्पॉन उपलब्ध हो सकेगा. अानेवाले वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार ने 18200 किसानों को मत्स्य पालन प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा है. अभी 5809 किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
2019-20 में ब्रायलर कुक्कुट पालन, सूकर पालन, बकरी पालन, बैक्यार्ड कुक्कुट पालन योजनाओं के अंतर्गत मांस तथा अंडा के उत्पादन में वृद्धि करने की योजना है. ग्रामीण पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन लाभुक जनित योजनाओं का कार्यान्वयन झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रोमोशन सोसाइटी एवं प्रगतिशील किसानों के माध्यम से कराने का निर्णय लिया गया है. इस वर्ष राज्य में 1.90 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन होने की संभावना है. राज्य में मछली की कुल घरेलू मांग 1.40 लाख मीट्रिक टन है.
इसलिए इस वर्ष लगभग 50 हजार मीट्रिक टन मछली का निर्यात करने की स्थिति आ गयी है. राज्य के मछली पालकों को विभागीय मत्स्य आहार के क्रय पर 50 प्रतिशत का अनुदान उपलब्ध कराने की योजना को वर्ष 2019-20 में जारी रखा जायेगा. कुल 8,066 मत्स्य मित्रों एवं मत्स्य बीज उत्पादकों के माध्यम से अब तक राज्य में 850 करोड़ मत्स्य बीज का उत्पादन हुआ है. आर्थिक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने हेतु कुल 1,28,684 मछुआरों को सामूहिक आकस्मिक दुर्घटना बीमा योजना अंतर्गत बीमित किया गया है. इससे आच्छादित बीमित की मृत्यु अथवा पूर्ण स्थायी अपंगता होने पर बीमा कंपनी द्वारा दो लाख रुपये का भुगतान किया जाता है.
आंशिक स्थायी अपंगता की स्थिति में एक लाख रुपये का भुगतान बीमित को किया जाता है. मछुआरा परिवारों को रहने का स्वस्थ परिवेश प्रदान करने के उद्देश्य से वेद व्यास आवास योजना के अंतर्गत कुल 2,735 मछुराआ परिवारों के लिए पक्का आवासों का निर्माण किया जा रहा है. 2019-20 में भी 2,100 मछुआ परिवारों को पक्का आवास की सुविधा प्रदान की जायेगी.
जल संसाधन
300 चेकडैम का होगा जीर्णोद्धार
रा ज्य सरकार ने अानेवाले वित्तीय वर्ष में 300 चेकडैम, 20 उद्वह सिंचाई योजना के निर्माण तथा 350 लघु सिंचाई योजना या तालाबों के जीर्णोद्धार का लक्ष्य रखा है. पिछले साल सरकार ने 389 शृंखलाबद्ध चेकडैम, आठ वियर योजना तथा सात उद्वह सिंचाई योजना का निर्माण पूरा किया है. इससे 41889 हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का सृजन किया गया है.
राज्य सरकार ने दावा किया है कि उत्तरी कोयल परियोजना के निर्माण से गढ़वा और पलामू में क्षेत्र में लगभग 16 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी. इस योजना के पूरा होने से पलामू में 12570 तथा गढ़वा में 2320 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी. इसका फायदा किसानों को मिलेगा. पलामू और गढ़वा में सिंचाई क्षमता को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने 1169 करोड़ रुपये की लागत से नयी योजना शुरू की है.
पिछले साल सरकार ने 389 शृंखलाबद्ध चेकडैम, आठ वियर योजना तथा सात उद्वह सिंचाई योजना का निर्माण पूरा किया
राज्य की 41889 हेक्टेयर भूमि में अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का सृजन किया गया है
पलामू और गढ़वा में सिंचाई क्षमता को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने 1169 करोड़ रुपये की लागत से नयी योजना शुरू की
उत्तरी कोयल परियोजना के निर्माण से गढ़वा और पलामू में 16 हजार हेक्टेयर में सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी
पलामू, देवघर, साहेबगंज, जमशेदपुर एवं गिरिडीह में 50 हजार लीटर क्षमता का डेयरी प्लांट स्थापित किया जायेगा
इस वर्ष राज्य में लगभग 1.90 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन होने की संभावना है
वेद व्यास आवास योजना के अंतर्गत कुल 2,735 मछुआरा परिवारों के लिए पक्का आवासों का निर्माण किया जा रहा है
राज्य में मछली की मांग 1.40 लाख मीट्रिक टन है. इस वर्ष 50 हजार मीट्रिक टन मछली के निर्यात की स्थिति
अानेवाले वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार ने 18200 किसानों को मत्स्य पालन प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा है
8,066 मत्स्य मित्रों एवं मत्स्य बीज उत्पादकों के माध्यम से अब तक राज्य में 850 करोड़ मत्स्य बीज का उत्पादन हुआ
खाद्य आपूर्ति विभाग
मिलेगा 15 रुपये प्रति किलो चना
रा ज्य के योग्य लाभुकों को आकस्मिक परिस्थिति में खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए झारखंड राज्य आकस्मिक खाद्यान्न कोष का गठन किया गया है.
इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत स्तर पर 10 हजार रुपये, शहरी क्षेत्र में नगर निकाय स्तर पर 10 हजार रुपये तथा जिलों में उपायुक्त स्तर पर पांच लाख रुपये उपलब्ध कराये गये हैं. इस कोष से प्रति योग्य लाभुक को जरूरत होने पर 10 किलो चावल खुले बाजार से क्रय कर नि:शुल्क उपलब्ध कराया जा सकता है.
इधर, खाद्य आपूर्ति विभाग ने जन वितरण प्रणाली के माध्यम से हर राशन कार्डधारी को प्रति माह एक किलो चना 15 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है. यह योजना केंद्रीय अनुदान से संचालित होगी. उज्ज्वला योजना के तहत बीपीएल, एससी, एसटी व अत्यंत पिछड़ा वर्ग परिवार तथा अंत्योदय योजना के लाभुक को गैस कनेक्शन नि:शुल्क दिया जा रहा है. वर्ष 2019-20 में 15 लाख परिवारों को इस योजना से जोड़ने का लक्ष्य है.
लाभुकों को आकस्मिक परिस्थिति में अनाज उपलब्ध कराने के लिए झारखंड राज्य आकस्मिक खाद्यान्न कोष का गठन किया गया इस कोष योग्य लाभुक को जरूरत होने पर 10 किलो चावल बाजार से क्रय कर नि:शुल्क दिया जायेगा
उज्ज्वला योजना के तहत बीपीएल, एससी, एसटी व अत्यंत पिछड़ा वर्ग परिवार को नि:शुल्क गैस कनेक्शन दिया जा रहा है
वित्तीय वर्ष 2018-19 में राज्य के 13.73 लाख परिवारों को गैस कनेक्शन दिया गया
राज्य के 1.5 लाख ग्रामीण बेघरों को आवास देने का लक्ष्य
ग्रामीण िवकास विभाग
वित्तीय वर्ष 2019-20 में 1.5 लाख ग्रामीण बेघरों को आवास देने का लक्ष्य तय किया है. प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत सारे आवासों का निर्माण कराया जायेगा. वहीं दुर्गम क्षेत्रों में शीट वाली छत बनाने की भी अनुमति ग्रामीणों को दे दी गयी है. अब यह आवश्यक नहीं कि ढलाई वाली ही छत बने.
गावों को मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जायेगा. फिलहाल रूरबन मिशन योजना के साथ ही सांसद आदर्श ग्राम योजना, प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, मुख्यमंत्री स्मार्ट ग्राम योजना व आदर्श ग्राम योजना से गांवों को विकसित किया जायेगा. वहीं वित्तीय वर्ष 2019-20 में मॉडल गांव बनाने के लिए अटल ग्रामोत्थान योजना शुरू करायी जायेगी.
इसका उद्देश्य है कि जो कार्य दूसरी योजनाओं से नहीं कराये जा सके हैं, उसे अटल ग्रामोत्थान योजना से करायी जायेगी. पीएम आवास योजना की तर्ज पर बाबा साहेब आंबेडकर आवास योजना राज्य सरकार अपने कोष से चला रही है. विधवा मुखिया वाले परिवारों के अलावा प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों व परित्यक्ता महिलाओं को इस योजना से लाभ दिया जा रहा है. भविष्य में इस योजना को और कारगर बनाया जायेगा.
2019-20 में मॉडल गांव बनाने के लिए अटल ग्रामोत्थान योजना शुरू करायी जायेगी
पीएम आवास योजना की तर्ज पर आंबेडकर आवास योजना राज्य सरकार अपने कोष से चला रही है
राज्य के गावों को मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जायेगा
योजनाएं तो अच्छी हैं, यह बेहतर तालमेल से लागू हों
डॉ आरपी सिंह रतन
पूर्व निदेशक प्रसार शिक्षा, बीएयू
राज्य ने इस बार कृषि को प्राथमिकता के क्षेत्र में रखा है. इसके लिए काफी राशि का प्रावधान किया गया है. सबसे अधिक राशि में वृद्धि कृषि और उससे जुड़े सेक्टर में की जा रही है. यह राज्य को विकास की ओर ले जानेवाला बजट है.
इससे कृषि आगे बढ़ेगा. पहली बार सरकार ने कृषि के साथ-साथ कृषक कल्याण की बात बजट में कही है. ऋण की माफी तो बहुत राज्यों में हो रही है, लेकिन किसानों को आर्थिक सहायता देकर नयी पहल की गयी है. इससे कृषक समृद्ध होंगे. स्कीम तो अच्छी है, लेकिन इसके लिए अधिकारी, कृषक और वैज्ञानिकों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत होगी.
मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना से मार्जिनल किसानों को भी फायदा होगा. झारखंड में सबसे अधिक मार्जिनल किसान ही है. सिंचाई की सुविधाओं के लिए सुजालम-सुफालम योजना अच्छी पहल है. गांव-देहात की पुरानी योजनाओं के जीर्णोद्धार से सिंचाई की सुविधा बढ़ेगी. यह राज्य के लिए सबसे जरूरी है. अधिक से अधिक किसानों को ड्रिप एरिगेशन से जोड़ने का प्रावधान किया गया है. यह राज्य सरकार का प्रगतिशील कदम है.
सरकार ने किसानों के लिए कोल्ड स्टोरेज की बात तो कह दी है. एक प्रयास किसानों को परिवहन सुविधा देने के लिए भी होनी चाहिए थी. परिवहन सुविधा मिलने से किसान अपने उत्पाद बाजार तक ले जा सकेंगे. किसानों को मोबाइल देने की अच्छी पहल की गयी है. इससे किसानों को बाजार मूल्य के साथ-साथ मौसम की सूचना भी मिल पायेगी. धान की खरीद पर बोनस देने से किसान अधिक उपज के लिए प्रेरित होंगे.
एक बार फिर किसानों को इजराइल भेजने की योजना है. इनके साथ प्रसार और कृषि वैज्ञानिकों को भी भेजा जाना चाहिए. इससे किसानों के ज्ञान का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा. उनके ज्ञान को इंटीग्रेटेड किया जा सकेगा. इसके लिए किसानों का एक ग्रुप भी बनाया जाना चाहिए. झारखंड में करीब 30 फीसदी वन है. इसके लिए मीठी क्रांति असरदार स्कीम है.
इससे किसानों की आय बढ़ेगी. सरकार को कृषि के साथ-साथ पशुपालन, वानिकी, फिशरी पर भी ध्यान देने की जरूरत थी. डेयरी डेवलपमेंट के साथ-साथ, बकरी, सूकर, भेड़ पालन को प्रोत्साहन देने के लिए भी स्कीम होनी चाहिए. नस्ल सुधार कार्यक्रम इस राज्य के लिए बहुत जरूरी है. इसके बेहतर संचालन के लिए सरकार को प्रयास करना चाहिए. इसका असर आनेवाले समय में दिखेगा.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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