रांची : ध्वनि मत से 2239.82 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित

सरकार ने हाइकोर्ट निर्माण की बढ़ी राशि नियमित की रांची : सोमवार को विधानसभा में 2239.82 करोड़ रुपये का तृतीय अनुपूरक बजट पारित कर दिया गया. इससे संबंधित विनियोग विधेयक को भी सदन ने ध्वनि मत से पारित कर दिया. इससे पहले शुक्रवार को पेश किये गये अनुपूरक बजट पर कांग्रेस के सुखदेव भगत ने […]

सरकार ने हाइकोर्ट निर्माण की बढ़ी राशि नियमित की
रांची : सोमवार को विधानसभा में 2239.82 करोड़ रुपये का तृतीय अनुपूरक बजट पारित कर दिया गया. इससे संबंधित विनियोग विधेयक को भी सदन ने ध्वनि मत से पारित कर दिया. इससे पहले शुक्रवार को पेश किये गये अनुपूरक बजट पर कांग्रेस के सुखदेव भगत ने कटौती प्रस्ताव पेश किया.
इसके समर्थन में कुणाल षाड़ंगी, भानुप्रताप शाही और प्रदीप यादव ने अपनी बातें रखी. जबकि इसके विरोध में अमित मंडल और अनंत कुमार ओझा ने बातें रखी. सरकार की ओर से उत्तर देते हुए प्रभारी मंत्री नीलकंठ सिंह ने कहा कि हाइकोर्ट निर्माण की बढ़ी हुई राशि को सरकार ने नियमित कर दिया है. सरकार ने 35,400 नयी नियुक्ति कर दी है, इसके लिए भी राशि का प्रावधान किया गया है.
कटौती प्रस्ताव लाते हुए सुखदेव भगत ने कहा कि नौ माह में सरकार ने केवल 49 फीसदी खर्च किया है. तीन माह में 51 फीसदी खर्च करना है. सरकार को हर दिन 536 करोड़ रुपये खर्च करने हैं. सरकार राशि तो ले रही है, लेकिन हर साल सरेंडर बढ़ता जा रहा है. कटौती प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि सरकार विकास करने का दावा कर रही है.
लेकिन, ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स में 36 राज्यों में झारखंड का 34वां स्थान है. सरकार ने एक आदिवासी युवक बलिया सोरेन को 11 लाख की नौकरी स्किल समिट में देने की घोषणा कर लोगों को दिग्भ्रमित किया. बीआइटी सिंदरी से इस लड़के का चयन पहले ही हो चुका है. सरकारी योजना का राजनीतिकरण किया जा रहा है. प्रदीप यादव ने कहा कि पहले अनुपूरक में 2596, दूसरे में 1117 तथा तीसरे अनुपूरक में 2239 करोड़ रुपये का प्रावधान सरकार ने किया है. तीनों अनुपूरक मिला कर कुल छह हजार करोड़ रुपये की मांग की है. अनुपूरक का प्रावधान मूल बजट के खर्च होने पर होना चाहिए. मूल बजट की राशि खर्च हुई नहीं है, अनुपूरक बजट सरकार के कुप्रबंधन को दिखाती है. सरकार पैसे का प्रावधान लूट-खसोट के लिए करती है.
झारक्राफ्ट की सीइओ रेणु इसकी उदाहरण हैं. इनको सरकार अब तक बचा रही है. दूसरे मामले में बिना जांच किये प्राथमिकी हो जाती है, जबकि इस मामले में प्राथमिकी तक नहीं हुई है. भवन निर्माण विभाग ने तो हाइकोर्ट भी नहीं छोड़ा. इसके निर्माण की लागत 200 करोड़ से 700 करोड़ हो गयी.
राशि सरेंडर करने वाले अधिकारियों को चिह्नित करें : भानु
भानु प्रताप शाही ने कहा कि राज्य में हर साल राशि सरेंडर हो रही है. पिछले साल करीब 15 हजार करोड़ की राशि सरेंडर हुई. इसकी कभी जांच नहीं हुई.
ऐसा क्यों होता है, पता नहीं किया जाता है. ऐसा करने वाले अधिकारियों को चिह्नित कर कार्रवाई करनी चाहिए. कटौती प्रस्ताव का विरोध करते हुए अमित मंडल ने कहा कि राज्य का पिछले चार का औसत विकास दर 8.7 फीसदी है. यह उल्लेखनीय प्रगति है. सरकार विकास योजनाओं के लिए राशि ले रही है. अनंत ओझा ने कहा कि सरकार पहली बार सबका साथ-सबका विकास योजना पर काम कर रही है.

विधानसभा का निर्माण समय पर नहीं होना चिंताजनक : अध्यक्ष
विधानसभा अध्यक्ष डॉ दिनेश उरांव ने समय से विधानसभा का निर्माण नहीं होने पर चिंता जतायी. उन्होंने कहा कि पहले इसका निर्माण दिसंबर 2018 तक करना था. अब जून 2019 तक करने की बात कही जा रही है.
इस पर प्रदीप यादव ने कहा कि खुद मुख्यमंत्री ने कहा था कि वर्तमान सरकार का अंतिम बजट सत्र नये परिसर में होगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. सोमवार को अनुपूरक बजट के दौरान गंभीर और सार्थक बहस हुई. इसकी सदन ने भी सराहना की. सदन के अध्यक्ष दिनेश उरांव ने कहा कि काफी अच्छा बहस हुई. यह अच्छा संकेत है.
रांची : 30 लाभुकों के नाम अवैध राशि की हुई थी निकासी, सीबीआइ के पास पड़ी है संचिका
रांची : ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने पीएम आवास योजना ग्रामीण की जांच सीबीआइ से कराने की सिफारिश एक साल पहले की थी. तब से संचिका सरकार के पास पड़ी हुई है. इस पर आगे की कार्रवाई नहीं हुई है. मामला पलामू, गढ़वा व लातेहार जिला से संबंधित है.
तीनों जिलों में आवास आवंटन के लिए अवैध निकासी हुई है. फर्जी लाभुक के नाम पर राशि निकाली गयी थी. इसमें प्रखंड कार्यालय के कर्मियों की संलिप्तता भी रही है. एक साल पहले जब यह मामला सामने आया था, तो ग्रामीण विकास विभाग ने इसकी जांच विभागीय टीम से करायी. रांची से जांच टीम वहां गयी और मामले की जांच की.
जांच में यह स्पष्ट हुआ था कि संबंधित प्रखंडों में कार्यरत कर्मियों ने मिलीभगत कर राशि की निकासी की है. जांच में यह भी पाया गया कि लाभुकों के चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी नहीं हुई थी, बल्कि फर्जी लाभुक के नाम पर पैसे निकाले गये. पहले फर्जी लाभुक के नाम पर खाता खोला गया, फिर उसमें राशि भेजी गयी और निकाल ली गयी.
मुख्यालय के आदेश के बाद इस मामले में प्राथमिकी भी दर्ज हुई. आरोपी गिरफ्तार भी हुए. मुख्यालय प्रखंड विकास पदाधिकारियों पर कार्रवाई करने की दिशा में कार्रवाई भी करने की तैयारी कर रहा था. इस बीच मंत्री ने यह निर्णय लिया कि मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से करायी जाये. फिर जांच के लिए सिफारिश सरकार से की गयी.
कोयला तस्करी का मामला सदन में उठा
रांची : सोमवार को प्रभात खबर के पहले पृष्ठ पर पुलिस करा रही है कोयला तस्करी शीर्षक से छपी खबर पर सदन में आवाज उठी. झामुमो विधायक जयप्रकाश भाई पटेल ने खबर का हवाला देते हुए कहा कि जब राज्य में पुलिस ही कोयला चोरी में लगी है, तो आगे क्या कहना़ इस मामले को सरकार संज्ञान में ले़
कार्यस्थगन के माध्यम से इन मुद्दों को उठाया
स्वर्णरेखा में ईचा डैम की ऊंचाई बढ़ाने का विरोध
विधायक दीपक बिरुआ ने कार्यस्थगन के माध्यम से स्वर्णरेखा नदी पर ईचा खरखाई डैम की ऊंचाई बढ़ाने का विरोध किया़ विधायक का कहना था इससे 124 गांव प्रभावित होंगे़ एसटी-एससी परिवार के 50 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित होंगे़ विधायक ने कहा कि पेसा कानून का ख्याल नहीं रखा जा रहा है़ ग्रामसभा के माध्यम से अधिग्रहण नहीं हुआ है़
कुड़मी-कुरमी को आदिवासी का दर्जा दिये जाने की मांग
झामुमो विधायक जगन्नाथ महतो व जय प्रकाश भाई पटेल ने कार्यस्थगन लाकर कुड़मी-कुरमी जाति को आदिवासी का दर्जा दिये जाने की मांग रखी़
बालू उठाव के विरोध में किसान आमरण अनशन पर
विधायक प्रदीप यादव ने गोड्डा में किसानों के आमरण अनशन का मामला कार्यस्थगन के तहत लाया़ श्री यादव का कहना था कि नदी के नौ किमी एरिया में बालू उठाव की अनुमति दी गयी है़ इससे नदी बर्बाद हो जायेगी. ग्रामीण पेयजल और सिंचाई का संकट होगा़ सरकार अनशनकारियों से बात करे़ डेढ़ लाख लोग प्रभावित है़ं जीवन-मरण का सवाल है़

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >