रांची : अधर में एक रुपये में एक लीटर मिनरल वाटर पिलाने की योजना, 141 चिह्नित जगहों में सिर्फ इन जगहों पर लगे प्लांट

उत्तम महतो, रांची : शहरवासियों को एक रुपये में एक लीटर मिनरल वाटर पिलाने की रांची नगर निगम की योजना अधर में लटक गयी है. मिनरल वाटर का प्लांट लगाने के लिए रांची नगर निगम की ओर से शहर में 141 जगहों को चिह्नित किया गया था, लेकिन दो साल में सिर्फ चार जगह ही […]

उत्तम महतो, रांची : शहरवासियों को एक रुपये में एक लीटर मिनरल वाटर पिलाने की रांची नगर निगम की योजना अधर में लटक गयी है. मिनरल वाटर का प्लांट लगाने के लिए रांची नगर निगम की ओर से शहर में 141 जगहों को चिह्नित किया गया था, लेकिन दो साल में सिर्फ चार जगह ही वाटर प्लांट लगाये जा सके हैं.
बाकी के प्लांट क्यों नहीं लगे, इस बारे में निगम के पदाधिकारी का कहना है कि स्थानीय लोगों के विरोध के कारण ये प्लांट नहीं लगाये जा सके. इस योजना के तहत नगर निगम शहर के अपने 141 एचवाइडीटी व मिनी एचवाइडीटी के समीप मिनरल वाटर का प्लांट लगाता.
पीपीपी मोड के तहत लगाये जा रहे इस प्लांट में आम लोगों को एक रुपये में एक लीटर पानी व सात रुपये में 20 लीटर पानी का एक जार उपलब्ध कराने की योजना थी. जो भी एजेंसी मिनरल वाटर प्लांट लगाती, उससे बदले में निगम प्रति लीटर की दर से 10 पैसे राजस्व के रूप में लेता.
प्लांट लगता, तो ये होता फायदा
आज लोगों के लिए शुद्ध पानी पीना एक सपना हो गया है. शुद्ध पानी के लिए लोग आज कंपनियों से जार के माध्यम से पानी खरीद रहे हैं. लेकिन यहां उन्हें 20 लीटर के एक जार खरीदने के लिए 30-40 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं. प्लांट लगने से लोगों को सस्ता व शुद्ध पानी मिलता.सात रुपये में 20 लीटर पानी का एक जार उपलब्ध कराने की भी थी योजना.
सिर्फ इन जगहों पर लगे प्लांट
नगर निगम द्वारा राजधानी में 141 जगहों को मिनरल वाटर प्लांट लगाने के लिए चिह्नित किया गया था, लेकिन इनमें से केवल चार जगह ही इन प्लांटों को लगाया जा सका है. जिन चार जगहों पर प्लांट लगे हैं-उसमें हिनू काली मंदिर रोड, डिबडीह पुल के समीप, जयपाल सिंह स्टेडियम के सामने व निर्वाचन आयोग धुर्वा के समीप पराठा मैदान शामिल है.
स्थानीय लोगों ने किया विरोध
चार के अलावा अन्य जगहों पर निगम द्वारा चयनित एजेंसी जब प्लांट लगाने पहुंची, तो स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया. विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि अगर प्लांट लग गया, तो रात दिन भूगर्भ जल यहां से निकाला जायेगा. इससे हमारी बोरिंग सुख जायेगी. भविष्य में उन्हें पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ेगी.
वहीं निगम के वाटर बोर्ड के पदाधिकारियों की मानें, तो बोतलबंद पानी बेचने वाली निजी कंपनियों ने लोगों को विरोध के लिए उकसाया. उन्हें लग रहा था कि अगर निगम के ये सभी प्लांट लग गये, तो उनके दिन लदने वाले हैं. इसलिए लोगों को भड़का कर निगम को प्लांट लगाने नहीं दिया गया.

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