मांडर : चार बीडीओ, दो बीपीओ सहित मुखिया के खिलाफ प्राथमिकी

मनरेगा के तहत कूप बनाने के नाम पर हड़प ली थी राशि मांडर : मांडर प्रखंड में मनरेगा की एक योजना में बिना कार्य कराये 3.11 लाख रुपये गबन करने के मामले में चार बीडीओ, दो बीपीओ, एक रोजगार सेवक, एक पंचायत सेवक व मुखिया पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है.वर्तमान बीडीअो ने मांडर थाना […]

मनरेगा के तहत कूप बनाने के नाम पर हड़प ली थी राशि
मांडर : मांडर प्रखंड में मनरेगा की एक योजना में बिना कार्य कराये 3.11 लाख रुपये गबन करने के मामले में चार बीडीओ, दो बीपीओ, एक रोजगार सेवक, एक पंचायत सेवक व मुखिया पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है.वर्तमान बीडीअो ने मांडर थाना में इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी है.
मामला छह साल पहले का है. इतने समय के बाद इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गयी है. दर्ज प्राथमिकी में तत्कालीन बीडीओ गोपी उरांव, शीलवंत कुमार भट्ट, निवेदिता नियति व शहंशाह अली खान, बीपीओ सुष्मिता गुप्ता, संजय कुमार साहू, पंचायत सेवक मोहन मुंडा, रोजगार सेवक संध्या मिंज व मुखिया प्रकाश खलखो के नाम शामिल हैं. मांडर थाना प्रभारी सतीश कुमार गोराई ने बताया कि धारा 406/ 409 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी है.
तत्कालीन बीडओ गोपी ने लाभुक से हस्ताक्षर करा पहला चेक का पैसा खुद रख लिया था
मांडर बस्ती निवासी जलेश्वर लोहरा को वर्ष 2011-12 में कूप निर्माण योजना के तहत कुआं की स्वीकृति मिली थी. आरोप है कि कार्यादेश मिलने के बाद जलेश्वर लोहरा को तत्कालीन बीडीअो गोपी उरांव ने अपने कार्यालय में बुलाया और 14 हजार के चेक पर हस्ताक्षर करा लिया. इसके बाद बीडीअो ने उनसे चेक ले लिया और यह कहा कि मनरेगा के भुगतान की पहली किस्त की राशि उनकी होती है. पहली किस्त नहीं मिलने की वजह से जलेश्वर ने कूप की खुदाई नहीं की.
इस प्रकरण के काफी समय बाद जलेश्वर को पता चला कि सरकारी दस्तावेज में उसके नाम से स्वीकृत कूप पूरा करा लिया गया है. साथ ही पूरी राशि भी निकाल ली गयी है. तब जलेश्वर ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत अपने नाम से संबंधित सारे दस्तावेज की प्रतिलिपि प्रखंड कार्यालय से मांगी. दस्तावेज मिलने पर पता चला कि उक्त योजना में मेठ भी उन्हें ही दिखाया गया था.
सारे जगहों पर की थी शिकायत
इसके बाद जलेश्वर ने सारे दस्तावेज के साथ संबंधित कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिये सबसे पहले 10 अगस्त 2015 को मुख्य सचिव व ग्रामीण विकास के प्रधान सचिव को पत्र लिखा. फिर 14 सितंबर 2015 को आयुक्त तथा उपायुक्त से भी शिकायत की. 26 दिसंबर 2015 को मनरेगा आयुक्त को भी लिखित पत्र दिया. बाद में जलेश्वर ने न्याय की गुहार मुख्यमंत्री जन संवाद कोषांग से भी लगायी.
विभाग ने करायी थी जांच
जलेश्वर के पत्र के आलोक में ग्रामीण विकास विभाग ने इसकी जांच करायी थी. विभाग ने कूप निर्माण कराये बगैर 3,11,244 रुपये की निकासी के मामले को सही पाया था. इसके बाद ही विभाग ने मामले में संलिप्त पदाधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने, 12 प्रतिशत सूद सहित गबन की राशि की वसूली करने का आदेश जारी किया था. इसके बाद ही कार्रवाई शुरू की गयी है.

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