टाटा स्टील का ‘संवाद–2018’ कार्यक्रम संपन्न
रांची : टाटा स्टील द्वारा आयोजित ‘संवाद–2018’ कार्यक्रम के क्षेत्रीय और अंतिम राउंड का समापन रांची के रामकृष्ण मिशन आश्रम में बुधवार को हुआ. इसमें झारखंड के 14 जिलों और पड़ोसी राज्य बंगाल से 12 जनजातीय समुदायों (उरांव, भूमिज, हो, संथाल, मुंडा, खरिया, लोहरा, कोड़ा, लोढ़ा, करमाली, गोंड, महाली) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. मुख्य संवाद का आयोजन जमशेदपुर में 15-19 नवंबर 2018 को होगा.
रांची में आयोजित कार्यक्रम आदिवासी संस्कृति व पहचान की निरंतर प्रासंगिकता, शैक्षणिक प्रणाली की चुनौतियां, जिम्मेदार जमीनी शासन और वन आधारित आजीविका जैसे विभिन्न मुद्दों के समाधान पर आधारित था.
प्रतिभागियों ने नयी पीढ़ी को सामाजिक शिक्षा देने, कारीगरों के अपने उत्पाद प्रदर्शित करने के लिए मंच देने, अपनी भाषा व संस्कृति पर गर्व करने, अनुष्ठानों व परंपराओं को बढ़ावा देने और राजनीतिक व न्यायिक अधिकारों के प्रति जागरूक होने की जरूरत आदि विषय पर चर्चा की.
टाटा स्टील के सीएसआर के रायपुर संस्करण द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में मध्य भारत की 22 जनजातियों का प्रतिनिधित्व करते हुए 99 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. छत्तीसगढ़ के अलावा, महाराष्ट्र, ओड़िशा और मध्यप्रदेश के जनजातीय समुदायों ने भी इस दो दिवसीय समारोह में हिस्सा लिया. रांची में यह क्षेत्रीय संवाद का पांचवां दौर है. पहले चार संवाद ओड़िशा (गजपति), तमिलनाडु (मदुरै), राजस्थान (उदयपुर) और नागालैंड (दीमापुर) में आयोजित किये जा चुके हैं.
टाटा स्टील सीएसआर के चीफ सौरव रॉय ने कहा कि झारखंड में क्षेत्रीय संवाद जनजातीय दृष्टिकोण या विकास पर निष्पक्ष बातचीत को सक्षम करने में विशेष रूप से सार्थक रहा. गौरतलब है कि टाटा स्टील का वार्षिक कार्यक्रम संवाद–2018 का अभिन्न अंग क्षेत्रीय संवाद ’कमिंग टूगेदर फॉर सोशल चेंज’ के विषय पर केंद्रित जनजातीय समुदायों की चिंताओं को खत्म करने और उनके विभिन्न मुद्दों को चिह्नित कर उनका समाधान निकालने के लिए बातचीत आरंभ करने की एक पहल है. ‘संवाद’ जनजातियों (आदिवासियों) के विचारों, धारणाओं और उनकी चिंताओं को साझा करने के लिए एक मंच है. यह जनजातीय समुदायों को आगे बढ़ कर अपने सामाजिक जीवन और विकास को नियंत्रित करने वाले मुद्दों पर चर्चा शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करता है.
