संजय सेठ
भाजपा के वरिष्ठ नेता गामा सिंह का इस दुनिया से जाना जहां पार्टी के लिए बड़ी क्षति है, वहीं मेरे लिए निजी और पारिवारिक क्षति है. हमने अपने परम मित्र और एक राजनीतिक सहयोगी को खोया है. पिछले 35 वर्षों से लगातार हमसफर रहे गामा सिंह धर्म प्रिय, दोस्त एवं पार्टी के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तत्पर रहते थे.
वर्ष 1982 में गामा सिंह के बड़े भाई ने मुझसे कहा था कि गामा सिंह को अपने साथ रखो और भाजपा में सदस्य बनाअो. तभी मैंने और गुलशन अजमानी ने उनको भाजपा की सदस्यता ग्रहण करायी. रांची के विधायक सीपी सिंह चारों लोग मिल कर संघर्षरत रहे. सीपी सिंह के अलावा गामा सिंह भी रातू रोड के रहने वाले थे. एक मोहल्ले के कारण प्रगाढ़ता बढ़ती गयी. लगातार भाजपा के लिए संघर्ष करना, पुलिस की लाठी, मुकदमे और जेल की यात्रा में गामा सिंह हमसफर रहे.
रांची में कोई कार्यक्रम करना होता था, तो हम सब मिल कर सक्रिय भूमिका अदा करते थे. धीरे-धीरे राजनीति की संघर्ष यात्रा आगे बढ़ती गयी. 1990 में रांची विधानसभा में गुलशन अजमानी विधायक बने, तो मैं रांची नगर का अध्यक्ष बना. उसी समय गामा सिंह भाजयुमो के अध्यक्ष बने. 16 अक्तूबर 1990 को लालकृष्ण अाडवाणी की रथ यात्रा रांची पहुंची, तो गामा सिंह ने उसमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया.
अाडवाणी जी के रांची से जाते ही सुबह तीन बजे गुलशन अजमानी, रामजी लाल शारदा, ओम प्रकाश सर्राफ, यदुनाथ पांडेय, गामा सिंह और मेरी गिरफ्तारी हो गयी. गुलशन अजमानी के साथ अन्य लोगों को हजारीबाग जेल भेजा गया और मेरे साथ गामा सिंह एवं सर्राफ को रांची जेल भेजा गया. 25 दिनों तक हम सब जेल में रहे.
साथ में प्रेम कटारुका की भी गिरफ्तारी हुई. पार्टी के जनाधार को लगातार बढ़ाने में कैलाशपति मिश्रा, अश्वनी कुमार, इंदर सिंह नामधारी, समरेश सिंह का सान्निध्य मिलता रहा. 1992 में अयोध्या में कार सेवा में जाना हो, पांच अप्रैल को विश्व हिंदू परिषद की वोट क्लब की रैली हो अथवा एकता यात्रा के तहत कश्मीर के लाल चौक में तिरंगा फहराना हो, मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में गामा सिंह हम सब के साथ रहे. 2003 में मैं जब रांची महानगर का अध्यक्ष बना, तो मेरे साथ उपाध्यक्ष रह कर हमसफर बने. इसके बाद 2005 में गामा सिंह महानगर अध्यक्ष बने. इसके बाद उन्होंने मुख्यालय प्रभारी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बखूबी निभायी.
वर्ष 1983 को वो दिन याद है जब उस समय के सबसे बड़े डॉ रामबली सिंह ने हम सब से कहा कि रातू रोड की सड़क के लिए कुछ करो. मैं तुमलोगों के साथ हूं. ज्ञातव्य है कि रातू रोड की सड़क पहले लाल गुरगुट की होती थी, जिसके कारण स्कूटर सवार, दुकान सब लाल रंग से रंग जाते थे. फिर हम सबने गुलशन अजमानी और गामा सिंह के साथ तीन दिनों तक राम विलास पेट्रोल पंप के सामने बीच सड़क पर टेंट लगा कर धरना दिया था, जिसके बाद पटना से पीडब्ल्यूडी की टीम आयी और सड़क का निर्माण हुआ. गामा सिंह के रूप में हमने एक अच्छे कार्यकर्ता एवं एक अच्छे मार्गदर्शक को खोया है.
(लेखक खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष हैं)
