‘तेरे मीठे आलिंगन से मैं मिठास हो जाऊंगा...’

रांची: ‘गैरतें खाक में मिलाएं क्यों, सबकी चौखट पे सर को झुकाये क्यों’ जैसे ही कानपुर की अलका मिश्रा ने ये शेर सुनाया, सभा तालियों से गूंज उठी. एक के बाद कई गजल सुनानेवाली अलका मिश्रा हैरिटेज झारखंड द्वारा कांके रोड के श्रीराम गार्डेन में आयोजित गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुईं. स्वागत भाषण […]

रांची: ‘गैरतें खाक में मिलाएं क्यों, सबकी चौखट पे सर को झुकाये क्यों’ जैसे ही कानपुर की अलका मिश्रा ने ये शेर सुनाया, सभा तालियों से गूंज उठी. एक के बाद कई गजल सुनानेवाली अलका मिश्रा हैरिटेज झारखंड द्वारा कांके रोड के श्रीराम गार्डेन में आयोजित गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुईं. स्वागत भाषण सचिव वीना श्रीवास्तव ने दिया.

कार्यक्रम की शुरुआत अलका मिश्रा के सरस्वती वंदना से हुई. वहीं, तन्मय शर्मा ने ‘तेरे मीठे आलिंगन से मैं मिठास हो जाऊंगा’ कविता सुनाकर वाहवाही लूटी. राजीव थेपड़ा ने ‘चल-चल-चल-चल जल्दी कर अपने घर भी जाना है/थोड़ा वक्त बिता के वहां पे-लौटकर फिर आ जाना है’ सुनाकर माहौल को सूफियाना बना दिया.

इसे भी पढ़ें

पत्थर खदान में विस्फोट से घरों में दरार, ग्रामीणों ने किया विरोध

मारवाड़ी भवन में 16 सितंबर को होगा झारखंड चेंबर चुनाव

संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि हैरिटेज झारखंड के सचिव हरेंद्र सिन्हा ने ‘कभी बादल कभी तितली का नजारा करके/हम तो अब थक से गये चांद निहारा करके’ सुनाकर माहौल को गजलमय कर दिया. वरिष्ठ कवि व शायर कुमार बृजेंद्र ने भी वर्तमान परिदृश्य पर कटाक्ष करते हुए ‘नये कबूतर अच्छे दाने ढूंढ़ेंगें/ हम खुशियों के नये बहाने ढूंढ़ेंगे’ गजल सुनायी.

वहीं, कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं डॉ माया प्रसाद वर्मा ने अपनी कविता के जरिये जमाने की सच्चाई को उजागर किया. बेटियों को जाफरान बताते हुए शालिनी नायक ने कहा ‘सहन में धूप खिली जाफरान बेटी से-महक उठा मेरे दिल का जहान बेटी से’. डॉ राजश्री जयंती ने ‘सताती है जमीं मुझको, फलक भी आजमाता है/ये मेरा जज्बा सच्चा है, जो मेरे काम आता है’ सुनाया.

इसे भी पढ़ें

70-70 हजार रुपये रिश्वत लेकर बदल दी 200 से अधिक होमगार्ड के जवानों की जाति, जांच की मांग\

RANCHI : ‘कजरी द सावन क्वीन’ : होटल जेनिस्टा इन में फाइनल 19 अगस्त को

प्रवीण परिमल ने ‘मेरी नजरों में बढ़ जाती है उसकी और भी कीमत-मैं सोना हूं नहीं, जब खुद ये पीतल बोल देता है’ सुनाकर तालियां बटोरीं. संगीता कुजारा टाक ने ‘उदासी लिपटकर मुझसे कहने लगी/और भी लोग हैं जमाने में/जाने दो न’ सुनाया.

संध्या चौधुरी ने ‘यूं गुजरी मेरी रातें टिमटिमाते तारों की तरह’ सुनाया. असीत कुमार ने ‘वफा क्या है/रोक है न/बंधन बांधने वास्ते’ सुनाया. मो इमरान ने ‘प्यार करना कोई नदी से सीखे-प्यास बुझाना कोई नदी से सीखे’ कविता पेश की. वीना श्रीवास्तव ने ‘क्यों दिलो दिमाग पे छा गये/क्यों मेरी नजर में समा गये/है सवाल इसका जवाब दो’ कविता सुनायी.

कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर सभी सदस्यों ने दो मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि अर्पित की. इस मौके पर काफी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद थे.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >