स्पीकर के न्यायाधिकरण ने सुनाया फैसला
रांची : दलबदल मामले में स्पीकर दिनेश उरांव के न्यायाधिकरण ने पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी पर आपराधिक अवमानना चलाये जाने के मामले को खारिज कर दिया है. वादी (बाबूलाल मरांडी-प्रदीप यादव) और प्रतिवादी पक्ष (दलबदल के आरोपी छह विधायक) की दलील सुनने के बाद स्पीकर ने इससे संबंधित फैसला लिया है. प्रतिवादी पक्ष ने आवेदन देकर कहा था कि दलबदल का मामला स्पीकर के न्यायाधिकरण में चल रहा है. ऐसे में इसे प्रभावित करने के लिए बाबूलाल मरांडी एक चिट्ठी लेकर राज्यपाल से मिलने पहुंचे गये. यह स्पीकर के कोर्ट की आपराधिक अवमानना बनता है.
नाराज हुए स्पीकर : बहस के दौरान प्रतिवादी पक्ष के एक अधिवक्ता की दलील से स्पीकर नाराज भी हुए. अधिवक्ता का कहना था कि यहां जो कुछ भी निर्णय आयेगा, ऊपर बाउंड टेस्टिंग होगा. ऊपर के न्यायालय में भी उस पर विचार होगा. इतना सुनने के बाद स्पीकर ने कहा : मैंने पहले भी कहा था कि यहां दिनेश उरांव नहीं बोलता है. बात न्यायाधिकरण की कुर्सी की है. कुर्सी महत्वपूर्ण है. आप ऐसी बातें न करें. मैं भी ये बातें जानता हू़ं हम जान रहे हैं कि आप ऊपर जायेंगे, तो क्या कोई निर्णय इस भय से नहीं दूंगा.
प्रतिवादी पक्ष अधिवक्ता ने कहा : मैं कानून की बात कर रहा हूं. केवल आपको जानकारी दे रहा हूं, मेरी कोई दूसरी मंशा नहीं है. प्रतिवादी पक्ष के दूसरे अधिवक्ता ने फिर स्पीकर से अन्यथा नहीं लेने का आग्रह किया.
वादी पक्ष की दलील
राज्यपाल राज्य की प्रथम नागरिक हैं, भ्रष्टाचार का मामला जुड़ा है, बातें रखी जा सकती है
बाबूलाल ने अपने आवेदन में इस न्यायाधिकरण की अवमानना पर एक शब्द भी नहीं कहा है
राज्यपाल जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत सदस्यता रद्द कर सकती है
10वीं अनुसूची में ऑफर और प्रलोभन देना भी दोष हो सकता है, यहां तो दो को मंत्री, बाकी चार को कुछ न कुछ पद दिया गया
प्रतिवादी पक्ष की दलील
मामला जब आपके कोर्ट में चल रहा है, तो फिर राज्यपाल के पास जाकर इसे प्रभावित करने और महत्व कम करने गये
राज्यपाल दलबदल के मामले में सदस्यता रद्द नहीं कर सकती हैं, आपको अधिकार है
इनके पास यह पत्र था, तो साक्ष्य के रूप में क्यों नहीं लाये
राज्यपाल से एफआइआर दर्ज कराने की मांग की, पहले किसी थाने या न्यायालय में क्यों नहीं गये
बाबूलाल पूर्व मुख्यमंत्री है, कानून जानते हैं, तो फिर जिस मामले को आपके पास लाया, उसे राज्यपाल के पास कैसे ले गये
इस मामले में महाधिवक्ता की राय के बाद आपके पास आवेदन दिया गया है
क्या कहा स्पीकर ने
दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्पीकर ने कहा कि इस पत्र से संबंधित कोई गवाही हुई और न ही इसे साक्ष्य के रूप में रखा गया. 10वीं अनुसूची के तहत न्यायाधिकरण मामला सुन रहा है. इस मामले में न्यायाधिकरण को किसी तरह का व्यवधान नहीं हुआ है. सभी छह विधायकों की अवमानना चलाने की याचिका को अस्वीकृत किया जाता है.
