12वां मंत्री बनाना बाध्यता है या नहीं, बतायें

By Prabhat Khabar Digital Desk
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मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह के बाद होगी
रांची : झारखंड हाइकोर्ट में गुरुवार को कैबिनेट में 12वें मंत्री की नियुक्ति को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. जस्टिस अपरेश कुमार सिंह व जस्टिस रत्नाकर भेंगरा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से जानना चाहा कि कैबिनेट में 12वें मंत्री की नियुक्ति करना बाध्यता है अथवा सिर्फ यह विकल्प मात्र है. क्या 12वें मंत्री की आवश्यकता नहीं है. इसे स्पष्ट करने का भी निर्देश दिया. इस संबंध में यदि कोई जजमेंट है, तो उसकी जानकारी देने का निर्देश दिया गया.
खंडपीठ ने प्रार्थी के अधिवक्ता राजीव कुमार को शपथ पत्र के माध्यम से प्रार्थियों के क्रिडेंशियल के विषय में जानकारी देने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने मामले की सुनवाई एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दी. इससे पूर्व प्रार्थी की अोर से खंडपीठ को बताया गया कि दिसंबर 2014 के बाद राज्य कैबिनेट में 12 मंत्री में से 11 मंत्रियों ने ही शपथ ली है. संविधान का हवाला देते हुए बताया गया कि राज्य में विधायकों की कुल संख्या का अधिकतम 15 प्रतिशत विधायकों को ही मंत्री बनाया जा सकता है.
कुछ मामले में छोटे राज्यों में जहां विधायकों की संख्या 35-40 से कम है, वहां 12वें मंत्री की नियुक्ति में छूट दी गयी है. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी कांग्रेस नेता डाॅ प्रदीप कुमार बलमुचू व धीरज साहू ने जनहित याचिका दायर की है. याचिका में कहा गया है कि झारखंड कैबिनेट में 11 मंत्री हैं. 12वें मंत्री की नियुक्ति नहीं की गयी है.
रांची. जिला बार एसोसिएशन ने सीबीआइ कोर्ट के जज शिवपाल सिंह की अदालत का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. एसोसिएशन के पदाधिकारियों की गुरुवार को हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है. यह बहिष्कार 19 से 23 जनवरी तक रहेगा. बहिष्कार करने की वजह जज शिवपाल सिंह द्वारा अधिवक्ताअों के साथ लगातार अमर्यादित व्यवहार करना बताया जा रहा है.
गौरतलब है कि अधिवक्ता सत्यनारायण प्रसाद ने बार एसोसिएशन के सचिव को पत्र लिख कर जानकारी दी है कि एजेसी सह सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत में वाद संख्या टाइटल अपील 20/06 में वे अधिवक्ता हैं. उन्होंने पिता की मृत्यु हो जाने के कारण उक्त न्यायालय में अधिवक्ता सुरेश सिंह के माध्यम से एक माह समय की मांग की थी, पर न्यायाधीश महोदय ने इसके बाद भी दूसरे दिन की तिथि रख दी. पुन: दूसरे दिन अधिवक्ता ने समय की मांग को लेकर आवेदन दिया अौर प्रार्थना की गयी कि वे बहस करने नहीं आ सकते.
अत: श्राद्ध कर्म के बाद तारीख रखी जाये, पर इसके बाद भी अदालत में दूसरे दिन की तारीख रख दी गयी. अधिवक्ता के अनुसार, न्यायाधीश शिवपाल सिंह ने उनके साथ अमर्यादित व्यवहार किया. इसकी जानकारी अधिवक्ता ने बार एसोसिएशन को दी. बैठक में एसोसिएशन के महासचिव संजय विद्रोही, उपाध्यक्ष अनूप कुमार लाल, प्रशासनिक सचिव पवन रंजन खत्री, कोषाध्यक्ष अमन कुमार, सह कोषाध्यक्ष दीनदयाल सिंह, पुस्ताकलय सचिव प्रित्यांशु कुमार सिंह अौर कार्यकारिणी सदस्य मौजूद थे.
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