झारखंड : जानिए सीआइडी की जुबानी बकोरिया ऑपरेशन की कहानी

By Prabhat Khabar Digital Desk
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सीआइडी ने पलामू के बकोरिया कांड मामले में शपथ पत्र दायर किया है
रांची : सीआइडी ने पलामू के बकोरिया कांड मामले में शपथ पत्र दायर किया है. इसमें घटना के संबंध में मिली सूचना और ऑपरेशन को कैसे अंजाम दिया गया, इसका उल्लेख किया गया है. इसमें बताया गया है कि 209 कोबरा बटालियन के कमांडेंट ने बकोरिया कांड का ऑपरेशनल प्लान बनाया. इसमें कोबरा के दो एसॉल्ट ग्रुप को शामिल किया गया. इसमें 45 जवान शामिल थे. इनके अलावा स्पेशल एक्शन टीम के 16 लोगों को शामिल किया गया. सभी अत्याधुनिक हथियार से लैस थे.ऑपरेशनल प्लान आठ जून 2015 को इश्यू किया गया.
खूंटी में मौजूद कोबरा की ऑपरेशनल टीम सात जून 2015 की रात आठ बजे लातेहार के लिए रवाना हुई. रात 11 बजे ऑपरेशनल टीम स्पेशल एक्शन टीम से मिली. इसी क्रम में तकनीकी सूचना में पता चला कि 14 नक्सलियों का मूवमेंट सतबरवा इलाके में होने वाला है.
इस संबंध में पलामू के तत्कालीन एसपी मयूर पटेल ने सतबरवा ओपी के प्रभारी मो रुस्तम को जानकारी दी कि लातेहार-पलामू स्टेट हाइवे से नक्सलियों का मूवमेंट होने वाला है. इस आॅपरेशन को कोबरा लीड कर रहा है, तुम उनके साथ शामिल हो जाओ. आठ जून 2015 की रात 09:40 बजे स्टेशन डायरी में रुस्तम ने इसकी इंट्री की. फिर 13 पुलिसकर्मियों के साथ रात 10 बजे मूवमेंट में शामिल होने थाना से रवाना हुए. कोबरा की टीम रात 11:20 बजे बकोरिया पहुंच गयी थी. वहीं जिला पुलिस की टीम ने स्टेट हाइवे पर नाका लगा दिया, जबकि कोबरा की टीम ने सड़क किनारे मोर्चा संभाल लिया.
कुछ देर बाद एक रंगीन कलर की स्कॉर्पियो गाड़ी पलामू से लातेहार की ओर आती दिखी. इसके कुछ देर बात ही सिल्वर कलर की एक स्कॉर्पियो तेजी से आती दिखी. उसे रुकने का इशारा पुलिसवालों ने किया, तो वह तेजी से कच्ची सड़क की ओर (करीब 700-800 मीटर अंदर) मुड़ गयी. इसके बाद कोबरा के जवान तेज आवाज में वाहन को रोकने के लिए कहने लगे, लेकिन वाहन रोकने के बजाय उसमें सवार लोगों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. फिर वाहन से नीचे उतरकर करीब एक घंटा तक फायरिंग करते रहे. इससे साफ हो गया कि पुलिस पर फायरिंग करनेवाले लोग नक्सली हैं.
जवाब में कोबरा बटालियन भी फायरिंग करती रही. रात 12:15 बजे एसपी पलामू से और फोर्स की मांग की गयी. पलामू एसपी रात एक बजे अतिरिक्त फोर्स के साथ पहुंचे. करीब उसी समय पलामू के तत्कालीन आइजी ए नटराजन, 209 कोबरा बटालियन के कमांडेंट, सीआरपीएफ 134 और 111 बटालियन के कमांडेंट के अलावा लातेहार के तत्कालीन एसपी अजय लिंडा भी मौके पर पहुंच गये. उसी वक्त ऑपरेशन पूरा होने पर पारा बम फोड़ कर कोबरा की टीम ने लाइट बिखेर दिया. सर्च में कुल 12 शव बरामद किये गये.
आठ रेगुलर राइफल (कारबाइन भी शामिल), 188 राउंड लोडेड काटेज, 117 खोखा, एक खाली पारा बम, बड़े पैमाने पर नक्सलियों द्वारा उपयोग में लायी जाने वाली दवा व अन्य सामान बरामद किये गये. ऑपरेशन में कोबरा बटालियन ने 188 राउंड फायरिंग की थी और एक पारा बम फोड़ा. सतबरवा पुलिस ने 21 राउंड फायरिंग की थी. इसके बाद सभी शव को सतबरवा थाना ले जाया गया. वहां पर 12 में से तीन लोगों उदय यादव, योगेश कुमार और स्काॅर्पियो के चालक इजाज अहमद की पहचान की गयी.
तीन बार दी थी सूचना
सीआइडी ने रिपोर्ट में कहा है कि आइबी ने 25 मई 2015 व 27 मई 2015 को नक्सली अनुराग और अन्य दो नक्सलियों के मूवमेंट की जानकारी दिल्ली स्थित अपने कार्यालय को दी थी. वहां से इसकी सूचना झारखंड के डीजीपी, एडीजी विशेष शाखा और झारखंड के तत्कालीन आइजी सीआरपीएफ को दी गयी थी. फिर तीन जून 2015 काे आइबी ने पांच हार्डकोर नक्सलियों के मूवमेंट की सूचना दी थी.
फॉरेंसिक रिपोर्ट का हवाला
शपथ पत्र में मुठभेड़ को सही बताते हुए फॉरेंसिक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है. शपथ पत्र में कहा गया है कि स्काॅर्पियो से जब्त किये गये तौलिये की जांच के बाद फॉरेंसिक रिपोर्ट में इसेमानव खून से पूरी तरह सने होने की बात कही गयी है. इस पर गोलियों के निशान होने का उल्लेख किया है.
रिपोर्ट के हिसाब से स्काॅर्पियो पर 7.62एमएम, 5.56एमएम और 0.303 की गोलियों के निशान होने की बात कही गयी है. इसमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि मुठभेड़ में शामिल पुलिस व कोबरा में से किसी ने 0.303 की गोलियों का इस्तेमाल नहीं किया. इसका इस्तेमाल नक्सलियों ने किया था. घटनास्थल से 0.303 की राइफल भी जब्त की गयी थी.
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