रिम्स: जेनरेटर और सोलर पैनल से नहीं चलेगा डॉक्टर साहब का एसी

By Prabhat Khabar Digital Desk
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रांची : रिम्स के डॉक्टर अब बिजली कट जाने के बाद एसी की हवा नहीं खा पायेंगे. अस्पताल प्रबंधन के आदेश पर बिजली विभाग के कर्मचारियों ने डॉक्टरों के कमरे की एसी को जेनरेटर और सोलर पैनल से दिया गया कनेक्शन काटना शुरू कर दिया है. अस्पताल प्रबंधन ने आदेश दिया है कि जेनरेटर और सौर ऊर्जा का कनेक्शन केवल वार्ड के महत्वपूर्ण उपकरणों से ही जुड़ा रहेगा. इससे बिजली कटने के बावजूद मरीजों को मिलनेवाली जरूरी सेवाएं बाधित नहीं होंगी. गौरतलब है कि बिजली विभाग ने रिम्स प्रबंधन को यह बताया था कि डॉक्टरों के एसी का कनेक्शन सौर ऊर्जा से जोड़ने पर लोड बढ़ जा रहा है. ऐसे में वार्ड के महत्वपूर्ण उपकरणों से कनेक्शन देना संभव नहीं है.
10 जुलाई से हर हाल में शुरू करें कलेक्शन
रांची. रिम्स के सेंट्रलाइज्ड कलेक्शन सेंटर की जिम्मेदारी लेनेवाली एजेंसी जिल्ड इंडिया जल्द ही ब्लड कलेक्शन का काम शुरू कर सकती है. मंगलवार को रिम्स के निदेशक डॉ बीएल शेरवाल ने एजेंसी को हर हाल में 10 जुलाई से ब्लड कलेक्शन शुरू करने का निर्देश दिया है. एजेंसी के संचालक अजय कुमार ने निदेशक को बताया कि पैथोलॉजी, माइक्रोबॉयोलाॅजी एवं लेबोरेटरी मेडिसिन से कलेक्शन का कार्य शुरू कर दिया गया है. बॉयोकेमेस्ट्री विभाग से कलेक्शन का कार्य नहीं हो पाया है. बुधवार को वहां एनालाइजर से सेंटर को जोड़ दिया जायेगा. इसके बाद ब्लड कलेक्शन का कार्य शुरू हो जायेगा. कलेेक्शन सेंटर का उदघाटन स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी करेंगे. प्रबंधन इसके लिए उनसे समय ले रहा है.
बनने के बाद फिर खराब हुई एमआरआइ मशीन
रांची. रिम्स में 15 दिनों से खराब एमआरआइ मशीन मंगलवार को दुरुस्त हुई, लेकिन तीन मरीजों की जांच के बाद दाेबारा खराब हो गयी. इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा. सबसे ज्यादा परेशानी लंबे समय से इंतजार कर रहे मरीजों को हुई, जिनको जांच के लिए वेटिंग मिला था. जांच शुरू होने की सूचना पर मरीज सेंटर में आये थे, लेकिन बताया गया कि मशीन खराब हो गयी, जांच नहीं हाे सकती है. रेडियोलॉजी विभाग के एक कर्मचारी ने बताया कि एमआरआइ व सीटी स्कैन मशीन 10 साल से भी ज्यादा पुरानी हो गयी हैं. मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण अब मशीन लोड नहीं उठा पा रही है. इससे यह अक्सर खराब हो जाती है. इधर, इंजीनियर का कहना है कि मास्चर के कारण मशीन काम नहीं कर पा रही है.
कार्डियेक सर्जन डॉ राकेश ने दिया योगदान
रिम्स के कार्डियो थोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) में डॉ राकेश चौधरी ने मंगलवार को योगदान दे दिया. रिम्स निदेशक डॉ बीएल शेरवाल ने इसकी पुष्टि की है. डॉ चौधरी के योगदान देने पर रिम्स के सीटीवीएस विभाग में दो कार्डियेक सर्जन हो गये हैं. डॉ अंशुल कुमार दो माह पहले ही रिम्स में योगदान दे चुके हैं. उम्मीद है कि ओपीडी का दिन भी बढ़ाया जायेगा. मृत्यु प्रमाण के लिए भटक रहे हैं परिजन : रिम्स में मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए परिजन भटक रहे हैं. दो-तीन माह बाद भी लोगों को अपने परिजनों का मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा है. इसकी शिकायत मंगलवार उपाधीक्षक डॉ गोपाल श्रीवास्तव के पास पहुंची. उन्होंने बताया कि साॅफ्टवेयर में कुछ समस्या आ गयी थी, जिसे दूर कर लिया गया है.
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