झारखंड हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद रांची में सरस्वती पूजा में बजा डीजे, महिला को हार्टअटैक

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट के सख्त आदेशों और पूरे राज्य में डीजे पर प्रतिबंध के बावजूद सरस्वती पूजा विसर्जन के दौरान रांची में खुलेआम डीजे बजा. चुटिया बाजार में तेज आवाज के बीच एक महिला को हार्ट अटैक आ गया, जिन्हें समय रहते अस्पताल पहुंचाकर बचाया गया. पुलिस के अनुसार लिखित शिकायत नहीं मिलने से कार्रवाई नहीं हुई. 2023 से 2025 तक हाईकोर्ट के कई आदेशों के बाद भी नियमों का पालन न होना गंभीर सवाल खड़े करता है.

Ranchi News: रांची में डीजे बजाने को लेकर झारखंड का हाईकोर्ट गंभीर है. लगातार इस पर रोक के आदेश जारी होते रहे हैं. बावजूद इसके, सरस्वती पूजा के मौके पर रांची में डीजे खूब बजा. नतीजतन, लोग खूब परेशान हुए. हद तो तब हो गई, जब 26 जनवरी को विसर्जन के दौरान बज रहे डीजे की तेज आवाज से रांची के चुटिया बाजार स्थित मेन रोड निवासी एक महिला को हार्टअटैक आ गया. उनकी किस्मत थी कि घर में लोग मौजूद थे. उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जिससे उनकी जान बच गई.

क्या कहती है पुलिस

चुटिया का मामला केवल अस्पताल तक नहीं रहा. पुलिस को भी इसकी जानकारी दी गई. पुलिस कहती है कि उसे महिला के बीमार होने की खबर मिली. चुटिया थाना प्रभारी पूनम कुजूर कहते हैं, ‘किसी ने लिखित शिकायत नहीं की.’ पुलिस को यह मामला बड़ा नहीं दिखा. इसलिए कार्रवाई नहीं हुई.

2023 से 2025 के बीच हाईकोर्ट के कई आदेश आए

रांची ही नहीं, पूरे झारखंड में डीजे, शोर और ध्वनि प्रदूषण से संबंधित हाईकोर्ट की ओर से 19 सितंबर, 2023 से लेकर 20 अगस्त 2025 के बीच कई आदेश दिए गए. हर बार सरकार और पुलिस-प्रशासन को ताकीद किया गया. यहां तक कि अदालत ने डीजे पर पूरी तरह से रोक लगाने की बात भी कही. लेकिन, कार्रवाई जमीन पर उतरती नजर नहीं आई.

हाईकोर्ट ने कब-कब क्या आदेश दिए

सरकार के प्रयास नाकाफ

  • सितंबर 2023: अधिवक्ता खुशबू कटारुका की याचिका पर 19 सितंबर 2023 की सुनवाई में हाईकोर्ट ने माना कि लाउडस्पीकर, डीजे, ढोल-नगाड़े और किसी भी साउंड सिस्टम से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर सरकार का प्रयास नाकाफी है. मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति आनंद सेन की बेंच ने रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक इस पर पूरी तरह रोक लगा दी. अदालत ने अस्पतलों के 100 मीटर के दायरे को साइलेंस जोन घोषित करने का आदेश दिया. बेंच ने जिलों में शिकायत दर्ज करने के लिए अधिकारियों के नाम और मोबाइल नंबर सार्वजनिक करने का निर्देश दिया. शिकायत मिलते ही साउंड सिस्टम जब्त कर कानूनी कार्रवाई का आदेश भी दिया.

डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध

  • जुलाई 2024: 16 जुलाई 2024 को अधिवक्ता शुभम कटारुका, उष्मा पांडेय और नेहा भारद्वाज की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश डॉ बीआर षाड़ंगी और न्यायमूर्त सुजीत नारायण प्रसाद की बेंच ने सुनवाई की. बेंच ने डीजे के शोर को ‘आउट ऑफ कंट्रोल’ माना. इसे मरीजों, बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए गंभीर बताया. अदालत ने पूरे झारखंड में डीजे बजाने पर रोक लगा दी. अदालत ने साफ किया था कि किसी भी जुलूस या समारोह में डीजे की अनुमति नहीं दी जा सकती. उल्लंघन करने पर स्थानीय थाना प्रभारी की जिम्मेदारी तय होगी. एसपी और एसएसपी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था.

स्कूल भी साइलेंस जोन में शामिल

  • अक्टूबर 2024: 16 अक्टूबर 2024 को अधिवक्ता खुशबू कटारुआ की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति दीपक रोशन बेंच ने स्कूल और कॉलजों के 100 मीटर दायरे को भी साइलेंस जोन में शामिल करने का आदेश दिया. आदेश में अदालत ने अपने निर्देशों को और सख्त करते हुए शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखने का आदेश दिया. अदालत ने कहा कि आदेशों को अखबारों, केबल टीवी और सोशल मीडिया पर प्रकाशित किया जाए.

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नियमों का पालन नहीं

  • अगस्त 2025: अधिवक्ता खुशबू कटारुका, उष्मा पांडे और नेहा भारद्वाज की याचिका पर 20 अगस्त 2025 को मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की बेंच ने माना कि जमीनी स्तर पर नियमों का पालन नहीं हो रहा है. अदालत ने सरकार को क्विव रिड्रेसल मैकेनिज्म तैयार करने का निर्देश दिया. अदालत ने इसमें टोल-फ्री नंबर, फ्लाइंग स्क्वॉड, रियल-टाइम वेरिफिकेशन और क्विक एक्शन टीम को शामिल करने का भी निर्देश दिया. गृह विभाग के सचिव को एसओपी तैयार कर अदालत में पेश करने का आदेश दिया गया.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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