रामगढ़ से अजय कुमार की रिपोर्ट
Ramgarh News: रामगढ़ जिले के गिद्दी स्थित सिरका क्षेत्र में बंद पड़ी भूमिगत खदानें अब गंभीर खतरे का कारण बनती जा रही हैं. खदानों में समय पर और सही तरीके से बालू से बैकफिलिंग नहीं किए जाने के कारण जमीन धंसने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. इससे आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है.
कहुआबेड़ा समेत कई इलाकों में दिख रहा असर
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार कहुआबेड़ा और आसपास के क्षेत्रों में कई जगह जमीन धंस चुकी है. जमीन के नीचे खाली हो चुके हिस्सों के कमजोर पड़ने से यह स्थिति उत्पन्न हो रही है. लोगों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है.
वर्षों पहले बंद हुई खदानें, लेकिन सुरक्षा उपाय अधूरे
ग्रामीणों ने बताया कि सिरका क्षेत्र की भूमिगत खदानें वर्षों पहले बंद कर दी गई थीं. लेकिन बंद करने के बाद आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया. विशेष रूप से बैकफिलिंग का कार्य अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे जमीन के नीचे खाली जगहें बनी रह गईं. यही अब धीरे-धीरे धंसाव का कारण बन रही हैं.
रामगढ़ विधायक ममता देवी ने किया निरीक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए रामगढ़ विधायक ममता देवी ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने उन्हें पूरी समस्या से अवगत कराया और अपनी चिंताएं साझा कीं. उन्होंने बताया कि यह समस्या अब लगातार बढ़ती जा रही है और जीवन के लिए खतरा बनती जा रही है.
ग्रामीणों की मांग: जल्द हो सर्वे और बैकफिलिंग
ग्रामीणों ने विधायक से मांग की है कि खदान प्रभावित क्षेत्रों का जल्द से जल्द सर्वे कराया जाए. साथ ही, जहां-जहां जमीन धंस रही है, वहां तत्काल बैकफिलिंग और अन्य सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं. उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में गंभीर दुर्घटना हो सकती है.
प्रशासन से कार्रवाई का आश्वासन
विधायक ममता देवी ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए खनन प्रबंधन को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश देने का आश्वासन दिया है. उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
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आंदोलन की चेतावनी, बढ़ सकता है जनआक्रोश
ग्रामीणों ने साफ कहा है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे. इस चेतावनी से स्पष्ट है कि स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. अब देखना होगा कि प्रशासन और खनन विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है.
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