फोटो फाइल 24आर-30- कैथा प्राचीन शिवमंदिर. फोटो फाइल 24आर-31- सिद्धेश्वर धाम मंदिर रामगढ. रामगढ़. महाशिवरात्रि की तैयारी शहर व आसपास के क्षेत्रों में अंतिम चरण में है. बुधवार को महाशिवरात्रि है. एनएच-23 कैथा प्राचीन महादेव मंदिर, नेहरू रोड के सिद्धेश्वर धाम महादेव मंदिर, कांकेबार स्थित महामाया मंदिर के शिवालय, गोलपार के बुढवा महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि की तैयारी है. मंदिर का रंग-रोगन किया गया है: साफ-सफाई के साथ विद्युत साज-सज्जा की गयी है. मंदिर के पुजारी के द्वारा जलाभिषेक व रूद्राभिषेक, आरती, श्रृंगार की तैयारी की है. कैथा प्राचीन महादेव मंदिर के पुजारी समीर चटर्जी ने बताया कि सुबह तीन बजे मंदिर की पानी से साफ-सफाई होगी. शिवलिंग का भव्य श्रृंगार फूल से किया जायेगा. पांच बजे से जलाभिषेक शुरू होगा. जो दिन भर चलता रहेगा. रात आठ बजे के बाद भस्म आरती होगी. मंदिर परिसर में भंडारा के साथ दिनभर भक्ति जागरण चलेगा. कैथा प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास कैथा एनएच-23 प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास पांच सौ वर्ष पुराना है. इस मंदिर को पदमा राजा दलेल सिंह ने बनाया था. तब रामगढ राज्य की राजधानी रामगढ थी. वर्ष 1670 में बनाया गया शिव मंदिर स्थापत्य कला का अदभूत उदाहरण है. मंदिर की बनावट मुगल, बंगाली, राजपूत शैली का मिश्रण है. निर्माण में लखौरी ईटों को सुर्खी, चूना, दाल के मिश्रण की जुड़ाई है. पहला तल्ला मंदिर का है. इसमें शिवलिंग स्थापित है. शिवलिंग के ठीक उपर वाले गुंबज में बरसात का पानी जमा होता है. जो शिवलिंग पर बूंद-बूंद कर गिरता था. कैथा प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास कैथा एनएच-23 प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास पांच सौ वर्ष पुराना है. इस मंदिर को पदमा राजा दलेल सिंह ने बनाया था. तब रामगढ़ राज्य की राजधानी रामगढ़ थी. वर्ष 1670 में बनाया गया शिव मंदिर स्थापत्य कला का अदभुत उदाहरण है. मंदिर की बनावट मुगल, बंगाली, राजपूत शैली का मिश्रण है. निर्माण में लखौरी ईटों को सुर्खी, चूना, दाल के मिश्रण की जुड़ाई है. पहला तल्ला मंदिर का है. इसमें शिवलिंग स्थापित है. शिवलिंग के ठीक उपर वाले गुंबज में बरसात का पानी जमा होता है. जो शिवलिंग पर बूंद-बूंद कर गिरता था.
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