पतरातू में चरमराई सफाई व्यवस्था, सड़क के किनारे कूड़े का अंबार बना परेशानी का सबब

Ramgarh News: रामगढ़ के पतरातू में सफाई व्यवस्था बदहाल है. सड़क किनारे कचरे के अंबार से दुर्गंध और प्रदूषण फैल रहा है. स्थानीय लोग परेशान हैं और प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. यह स्थिति स्वच्छ भारत अभियान की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

रामगढ़ से अजय तिवारी की रिपोर्ट

Ramgarh News: झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड में इन दिनों सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है. पतरातू-रांची मुख्य सड़क मार्ग पर हेसला पंचायत स्थित पेट्रोल पंप के पास पुराने नींबू बगान में कचरे का अंबार लगा हुआ है. सड़क किनारे और नालियों में फैली गंदगी ने प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्वच्छता को लेकर चलाए जा रहे अभियानों के बावजूद जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है.

लेक रिजॉर्ट के पास गंदगी का अंबार

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रसिद्ध लेक रिजॉर्ट से महज 500 मीटर की दूरी पर कचरे का ढेर लगा रहता है. यह इलाका पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, लेकिन यहां फैली गंदगी पूरे क्षेत्र की छवि खराब कर रही है. रोजाना इस रास्ते से गुजरने वाले राहगीरों और वाहन चालकों को दुर्गंध और गंदगी का सामना करना पड़ता है.

स्थानीय व्यवसायियों पर लापरवाही का आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि आसपास संचालित होटल, रिसोर्ट, ढाबा और ठेला-खोमचा संचालक इस समस्या के मुख्य कारण हैं. ये लोग अपने प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को निर्धारित स्थान पर डालने के बजाय सड़क किनारे, खाली जमीन और नालियों में फेंक देते हैं. प्लास्टिक, खाद्य अवशेष और अन्य अपशिष्ट के कारण कचरे का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे वातावरण प्रदूषित हो रहा है.

गर्मी में बढ़ी दुर्गंध और स्वास्थ्य खतरा

गर्मी के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है. तेज धूप के कारण कचरे से उठने वाली दुर्गंध दूर-दूर तक फैल जाती है, जिससे लोगों का उस रास्ते से गुजरना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा कचरे के कारण मक्खियों और मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बनी हुई है.

प्रशासनिक उदासीनता से बढ़ी नाराजगी

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से बनी हुई है. कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. कभी-कभार सफाई कर दी जाती है, लेकिन नियमित व्यवस्था नहीं होने के कारण कुछ ही दिनों में फिर से कचरा जमा हो जाता है. इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है.

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स्थानीय लोगों की मांग और समाधान की उम्मीद

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस क्षेत्र में कचरा निस्तारण की स्थायी व्यवस्था की जाए. नियमित सफाई अभियान चलाया जाए और खुले में कचरा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. साथ ही, व्यवसायियों को भी जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है. अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह न केवल पर्यावरण बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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