मातृ दिवस पर विशेष : मां की मेहनत ने बदली किस्मत, सीमा बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

मातृ दिवस पर विशेष : मां की मेहनत ने बदली किस्मत, सीमा बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

दुलमी. कहते हैं कि एक मां अपने परिवार की सबसे बड़ी ताकत होती है. वह हर कठिन परिस्थिति में अपने बच्चों के भविष्य के लिए संघर्ष करती हैं. दुलमी प्रखंड के उसरा गांव की सीमा कुमारी ने भी अपने अथक परिश्रम और हौसले से यह साबित कर दिया है. मातृ दिवस के अवसर पर सीमा कुमारी की कहानी उन हजारों ग्रामीण माताओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने परिवार और बच्चों के सपनों को संवारने में जुटी रहती हैं. सीमा कुमारी एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उनके पति सुबोध कुमार महतो गांव में छोटी खेती और जनरल स्टोर की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे. सात सदस्यों वाले परिवार की मासिक आय मुश्किल से छह हजार रुपये तक थी. इतने कम संसाधनों में बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था. कई बार अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर उन्हें गांव के महाजनों से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता था. इससे परिवार हमेशा आर्थिक दबाव में रहता था.

वर्ष 2017 में सीमा के जीवन में आया बदलाव : वर्ष 2017 में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) की पहल पर गांव में ज्योति सखी मंडल का गठन हुआ. सीमा कुमारी समूह से जुड़ीं और धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाने लगीं. समूह के माध्यम से उन्हें बैंक लिंकेज, बुक-कीपिंग और स्वरोजगार से जुड़ी जानकारी मिली. उनकी लगन और मेहनत को देखते हुए उन्हें सीएलएफ का लेखापाल भी बनाया गया. समूह से कम ब्याज दर पर ऋण मिलने के बाद सीमा ने 70 हजार रुपये निवेश कर सोनालिका बॉयलर मुर्गी फार्म शुरू किया. एक बार में 300 चूजों का पालन कर उन्होंने पोल्ट्री व्यवसाय को आय का मजबूत साधन बना लिया. उन्होंने वैज्ञानिक खेती और जनरल स्टोर के जरिए भी आमदनी बढ़ायी. आज उनकी वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है.

बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाना लक्ष्य : सीमा बताती हैं कि उनका सबसे बड़ा सपना अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देना है. आर्थिक स्थिति मजबूत होने के बाद उन्होंने अपने बच्चों का नामांकन जीपीएस पब्लिक स्कूल, जमीरा में कराया. अब परिवार का जीवन पहले से काफी बेहतर हो चुका है. मातृ दिवस पर सीमा कुमारी की यह कहानी यह संदेश देती है कि एक मां अगर ठान ले, तो कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी बदल सकती है.

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By SAROJ TIWARY

SAROJ TIWARY is a contributor at Prabhat Khabar.

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