लीड के साथ) बाक्स में ) हमने जफा न सीखी, तुमको वफा न आयी

By Prabhat Khabar Digital Desk
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संदर्भ - प्रेम प्रसंग में एक की हत्या भदानीनगर.हमने जफा न सीखी, तुमको वफा न आयी, पत्थर से दिल लगाये, और दिल पर चोट खायी. इस गीत ने मुकेश हत्याकांड के मामले में चरितार्थ होकर भदानीनगर क्षेत्रवासियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. प्रेम में पागल प्रेमचंद बेदिया के वफा जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया कि अपनी प्रेमिका की बेवफाई से क्षुब्ध होकर अपने अजीत मित्र मुकेश की हत्या करने पर मजबूर कर दिया. इस कांड उसके तीसरे अजीज मित्र देवानंद बेदिया ने साथ दिया. मुकेश, देवानंद, प्रेमचंद, तीनों सुख-दुख के साथी थे. प्रेमचंद बेदिया की पिछले तीन-चार वर्षों से चिकोर गांव की रहने वाली युवती से गहरी दोस्ती थी. प्रेमचंद इससे प्यार करता था. यही नहीं, प्रेमचंद ने अपनी प्रेमिका के साथ कई दफा रंगरेलियां भी मना चुका था. इस काम में मुकेश व देवानंद मदद करते थे. मुकेश के दिल में सोया हुआ शैतान एक दिन जाग उठा और मौका देख कर अपने दोस्त की प्रेमिका के साथ उसने संबंध बना लिया. मुकेश के कारनामे को प्रेमिका ने अपने प्रेमी प्रेमचंद से बतायी. प्रेमचंद को गुस्सा तो काफी आया, लेकिन दोस्ती न टूटे, इसके लिए उसने बातचीत कर सारे शिकवे भुला दिये. सोचा अब फिर गलती नहीं होगी. सभी की दोस्ती ठीक चल रही थी. लेकिन फिर इनके रिश्ते में तब खटास आया, जब मुकेश के मोबाइल पर प्रेमचंद की प्रेमिका ने फोन कर डाला. इस कॉल को प्रेमचंद ने रिसीव किया, क्योंकि मोबाइल उस वक्त प्रेमचंद के पास ही था. बात यहीं से बिगड़ी. प्रेमचंद ने देवानंद के साथ मिल कर हत्या की साजिश रच डाली. वफा जिंदगी बेवफा हो जायेगी, ऐसा मुकेश शायद सोच लेता, तो अपने दोस्त के साथ भी उसने दगा नहीं किया होता.
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