प्रतिनिधि मोहम्मदगंज भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच मोहम्मदगंज प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में गन्ने के जूस का व्यवसाय इन दिनों खूब फल-फूल रहा है. झारखंड में गन्ने का उत्पादन कम होने के कारण स्थानीय व्यवसायी महाराष्ट्र के नासिक से गन्ना मंगवा रहे हैं. डेहरी-ऑन-सोन के थोक विक्रेता के माध्यम से हर सप्ताह लगभग 60 क्विंटल गन्ने की खेप मोहम्मदगंज पहुंचती है. इस व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए संचालकों ने जुगाड़ तकनीक का सहारा लिया है. उन्होंने दो से तीन लाख रुपये की लागत से स्टीयरिंग चालित वाहनों पर जूस निकालने वाली मशीनें सेट की हैं. जैसे ही ये जूस गाड़ियां गांवों और बाजारों में पहुंचती हैं, गर्मी से परेशान लोग कतार में लग जाते हैं. गन्ने के रस में पुदीना, नींबू और काला नमक मिलाकर इसे और स्वादिष्ट व सेहतमंद बनाया जाता है. यह पेय न केवल प्यास बुझाता है बल्कि लू और गर्मी से भी राहत देता है. व्यवसाय की शुरुआत दामोदर मेहता ने की थी इस व्यवसाय की शुरुआत दामोदर मेहता ने की थी और उनकी सफलता देखकर पिछले दो वर्षों में नौ अन्य लोग भी इससे जुड़े हैं. प्रतियोगिता बढ़ने के बावजूद सभी की अच्छी कमाई हो रही है. विक्रेता प्रतिदिन करीब 20 किलोमीटर का सफर तय कर गांवों और बाजारों में घूम-घूमकर जूस बेचते हैं. इससे वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं. गन्ने का जूस अब मोहम्मदगंज में लोगों का पसंदीदा पेय बन चुका है.
कई गांवों में ईख के जूस से मिली आजीविका, भीषण गर्मी में बढ़ी कमाई
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