कई वार्डों में नियमित कचरा उठाव नहीं, सड़कों पर पसरी गंदगी
नगर निगम की सफाई व्यवस्था पूरी तरह लचर हो गई है. निगम प्रशासन की उदासीनता के कारण शहर के कई इलाकों में कूड़ा-कचरे का ढेर लगा है. नियमित सफाई कार्य सुचारू रूप से नहीं हो रहा है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बाजार क्षेत्र के साथ-साथ मुख्य मार्गों की सफाई भी सही तरीके से नहीं हो रही है. मुहल्लों की स्थिति और खराब है. नाला-नालियां गंदगी से भरी हैं, लेकिन उनकी सफाई के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. सड़क किनारे कूड़े का ढेर कई दिनों तक पड़ा रहता है, जिससे दुर्गंध और बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है. लोगों का कहना है कि डोर टू डोर कचरा संग्रहण कार्य नियमित नहीं है. सप्ताह में केवल दो से तीन दिन ही कचरा उठाने वाला वाहन मुहल्लों में आता है, जबकि शुल्क हर माह लिया जाता है. जिस दिन कचरा नहीं उठता, लोग मजबूरी में सड़क किनारे कचरा फेंक देते हैं, लेकिन निगम की टीम उसे उठाने में देरी करती है. यह समस्या किसी एक वार्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर के अधिकांश मुहल्लों में यही स्थिति है. शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है. 17 अप्रैल को निगम सभागार में हुई बैठक में भी वार्ड पार्षदों ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया. उन्होंने सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की. मेयर अरुणा शंकर ने सहायक नगर आयुक्त प्रमोद उरांव और नोडल प्रभारी मोहम्मद शाहिद हुसैन को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए, लेकिन अब तक हालात में सुधार नहीं दिख रहा है. जनप्रतिनिधियों का कहना है कि शहर को स्वच्छ रखना निगम प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन काम पुराने ढर्रे पर ही चल रहा है.
तीन कर्मियों के भरोसे वार्ड की सफाई
निगम के अनुसार प्रत्येक वार्ड में दो महिला और एक पुरुष सफाई कर्मी लगाये गये हैं. इन्हीं तीन कर्मियों के भरोसे पूरे वार्ड की सफाई व्यवस्था चल रही है. पार्षदों का कहना है कि इतनी कम संख्या में सफाई संभव नहीं है. कर्मियों की कमी के कारण नाला-नाली की सफाई प्रभावित हो रही है. पार्षदों ने नियमित सफाई और कचरा उठाव के लिए कर्मियों की संख्या बढ़ाने की मांग की है. निगम के अनुसार 188 सफाई कर्मी कार्यरत हैं, जिनमें कुछ ट्रैक्टर और टेंपो से कचरा उठाते हैं, जबकि कुछ को नालियों की सफाई में लगाया गया है.