1991 में स्थापना के बाद भी विकास की रफ्तार धीमी सैयद नौशाद अहमद, हुसैनाबाद. हुसैनाबाद अनुमंडल ने अपनी स्थापना के 35 वर्ष पूरे कर लिये हैं, लेकिन विकास और बुनियादी सुविधाओं के मामले में आज भी क्षेत्र पिछड़ा हुआ है. एक अप्रैल 1991 को तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने विधायक दशरथ कुमार सिंह के प्रयास से इस अनुमंडल की स्थापना की थी. झारखंड राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी यहां अपेक्षित विकास नहीं हो सका है. इन वर्षों में कई विधायक, सांसद और अधिकारी आये तथा चले गये, लेकिन अनुमंडल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में ठोस पहल नहीं हो सकी. वर्तमान में अनुमंडल कार्यालय कर्मियों की कमी से जूझ रहा है, जिससे आम लोगों के कार्य प्रभावित हो रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अनुमंडल का दर्जा केवल कागजों तक सीमित रह गया है, क्योंकि जरूरी सुविधाएं अब तक उपलब्ध नहीं हो सकी हैं. व्यवहार न्यायालय का अभाव क्षेत्र की बड़ी समस्या बना हुआ है. झारखंड गठन के बाद से यहां सिविल कोर्ट स्थापना की मांग लगातार उठती रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. हुसैनाबाद, हैदरनगर और मोहम्मदगंज क्षेत्र के लोगों को छोटे न्यायिक मामलों के लिए भी मेदिनीनगर जाना पड़ता है. इससे ग्रामीणों को आर्थिक और मानसिक परेशानी उठानी पड़ती है. अनुमंडल में उपकारागार निर्माण भी अधूरा पड़ा है. कामत गांव के समीप करीब 20 एकड़ जमीन पर जेल निर्माण की योजना शुरू हुई थी. 11 जून 2020 को इसका शिलान्यास किया गया. चहारदीवारी का निर्माण पूरा होने के बाद भी आगे का कार्य बंद है. स्थानीय जेल नहीं होने से कैदियों को मेदिनीनगर जेल भेजना पड़ता है. उपकोषागार नहीं होने के कारण लोगों को चालान जमा करने और सरकारी कार्यों के लिए जिला मुख्यालय जाना पड़ता है. आने-जाने और अन्य खर्च लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालते हैं. स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को कई बार उठाया, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकल सका है.
35 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हुसैनाबाद अनुमंडल
35 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हुसैनाबाद अनुमंडल
