संवाददाता, पाकुड़ : पाकुड़ जिले के हिरणपुर थाना क्षेत्र के सहरपुर स्थित काजू बागान में जून 2024 में 19 वर्षीय महिला के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में पाकुड़ की अदालत ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया. अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए नौ आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 376-डी के तहत प्राकृतिक जीवन के अंत तक कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनायी.
पीड़िता को मुआवजा देने का निर्देश
अदालत ने सभी दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा. अदालत ने निर्देश दिया कि जुर्माने से प्राप्त शत-प्रतिशत राशि पीड़िता को मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा के मुआवजे के रूप में दी जाये. साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पाकुड़ को विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत पीड़िता के लिए अतिरिक्त उचित मुआवजा निर्धारित करने का निर्देश दिया गया है.
ये नौ आरोपी दोषी करार
अदालत ने ग्राम कस्तूरी, थाना हिरणपुर, जिला पाकुड़ निवासी मानवेन मरांडी (28), चंदन सोरेन उर्फ चांद सोरेन (29), विवेक सोरेन (22), लखीराम मृधा उर्फ बाबूलाल मरांडी (22), जेने हांसदा (27), विश्वनाथ हेम्ब्रम (24), पांडु हेम्ब्रम (30), मिस्त्री हेम्ब्रम (30) और सकल हांसदा (34) को दोषी करार दिया.
पति को बंधक बनाकर दिया था वारदात को अंजाम
अभियोजन के अनुसार, घटना एक जून 2024 की शाम करीब 6.30 बजे की है. पीड़िता अपने पति के साथ हिरणपुर थाना क्षेत्र के सहरपुर स्थित काजू बागान में टहलने गयी थी. इसी दौरान कुछ युवक वहां पहुंचे और पीड़िता के पति को पकड़कर बंधक बना लिया. इसके बाद आरोपियों ने पीड़िता के साथ जबरदस्ती की और उसे झाड़ियों में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया. घटना को लेकर दो जून 2024 को हिरणपुर थाना में कांड संख्या 35/2024 दर्ज किया गया था.
छह गवाहों की हुई गवाही
सत्र वाद संख्या 143/2024 के तहत मामले की सुनवाई हुई. अभियोजन पक्ष की ओर से कुल छह गवाहों को अदालत में पेश किया गया. साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने नौ आरोपियों को दोषी करार दिया.
कम उम्र का हवाला देकर राहत की मांग खारिज
बचाव पक्ष की ओर से दोषियों की कम उम्र का हवाला देते हुए सजा में नरमी बरतने की अपील की गयी थी. अदालत ने इसे खारिज करते हुए अपराध की गंभीरता को देखते हुए कड़ी सजा सुनायी. न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह की घटना से पीड़िता को गहरी मानसिक और शारीरिक पीड़ा होती है तथा ऐसे जघन्य अपराध सामाजिक व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती हैं. ऐसे मामलों में कठोर सजा भविष्य के लिए नजीर बननी चाहिए.
