नदी पर पुल नहीं, जान जोखिम में डाल स्कूल जाते हैं विद्यार्थी

नदी पर पुल नहीं, जान जोखिम में डाल स्कूल जाते हैं विद्यार्थी

किस्को़ पेशरार प्रखंड के तुरियाडीह नदी पर पुल नहीं होने के कारण दर्जनों गांवों के लोग प्रभावित हैं. तुईमु और हेसाग पंचायत के तुरियाडीह, दुंदरु, जवाल, चपाल, हुंदी, जुड़नी, गुनी, सनई, हेन्हे, एरतोल, जुड़वानी, हिलती हपात, हेसाग, तुईमु सहित लगभग 15 गांवों की दो हजार से अधिक आबादी को आवागमन में परेशानी हो रही है. इन गांवों के 50 से अधिक बच्चों को प्रतिदिन नदी पार कर उच्च विद्यालय मुंगो और दुंदरु-जवाल स्थित मध्य विद्यालय जाना पड़ता है. बच्चे जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं और अक्सर पूरी तरह भींग जाते हैं. ऐसे में उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है. अभिभावकों को छोटे बच्चों के साथ नदी पार कराना पड़ता है. नदी में तेज धार होने पर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. बस्ता और कपड़े भींगने से बच्चों में बीमारी का खतरा रहता है. किताब-कॉपी भी भींग जाने से उसके फटने की चिंता विद्यार्थियों को सताती रहती है़ बरसात में नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है जिससे खतरा और बढ़ जाता है.स्थानीय ग्रामीणों विनय भगत, जयप्रकाश उरांव, मंगल उरांव, राजकुमार उरांव, राजू उरांव और शंकर उरांव ने बताया कि वे वर्षों से पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधि मूकदर्शक बने हुए हैं. अभिभावकों का कहना है कि जलस्तर अधिक होने पर बच्चे स्कूल नहीं जा पाते जिससे पढ़ाई बाधित होती है. नदी पार कर विद्यालय पहुंचने में चार-से पांच किलोमीटर लगते हैं. यदि वैकल्पिक रास्ता अपनाएं तो 20 से 25 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है. मामले पर बीडीओ अजय कुमार तिर्की ने कहा कि पुल निर्माण का कार्य जिला स्तर का है. ब्लॉक स्तर पर केवल राशन, पेंशन और कल्याणकारी योजनाओं का कार्य किया जाता है. ये काम जिला का है.

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By SHAILESH AMBASHTHA

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