सदर अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी, स्वीकृत पद 32 पदस्थापित हैं 20

सदर अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी, स्वीकृत पद 32 पदस्थापित हैं 20

लोहरदगा़ जिला का सदर अस्पताल खुद बीमार हालत में है. यह बीमारी प्राकृतिक नहीं बल्कि कृत्रिम है. संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन इच्छा शक्ति और जवाबदेही का अभाव साफ दिखता है. यहां मरीजों को इलाज देने से ज्यादा तत्परता निजी क्लिनिकों या फिर रांची रेफर करने में नजर आती है. चिकित्सक हल्की-फुल्की दुर्घटना में घायल मरीजों को भी तुरंत रेफर कर देते हैं. अधिकांश डॉक्टरों को रांची जाने की जल्दबाजी रहती है. अस्पताल में स्वीकृत चिकित्सक पद 32 हैं, जबकि पदस्थापित मात्र 20 हैं. महंगी मशीनें धूल फांक रही हैं और मरीज जांच के लिए बाहर जाने को विवश हैं. कमीशन और दलाली का खेल खुलेआम चल रहा है. अस्पताल परिसर गंदगी, दुर्गंध और ईंट-बालू के ढेर से भरा है. स्वच्छता का नामोनिशान नहीं है. शासन-प्रशासन दोनों मौन हैं. यहां व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नहीं : लोहरदगा में स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त अव्यवस्था पर लोगों ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है. सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जायसवाल का कहना है कि यहां व्यवस्था के नाम पर कुछ भी नहीं है. नेताओं और अधिकारियों के दावे खोखले साबित होते हैं. यदि आप किसी भी बीमारी के इलाज के लिए सदर अस्पताल जाते हैं तो वहां की अव्यवस्था और कर्मचारियों का व्यवहार आपको वहां से भागने को मजबूर कर देगा. एक स्लाइन चढ़ाने के लिए भी आपको किसी की पैरवी करानी होगी. सदर अस्पताल में लोग जाना नहीं चाहते : सेवा भारती के जिला अध्यक्ष दीपक सर्राफ का कहना है कि सदर अस्पताल की अव्यवस्था किसी से छुपी नहीं है. यहां लोग जाना नहीं चाहते हैं. सेवा भारती हर रविवार को निःशुल्क चिकित्सा शिविर लगाता है जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. यदि सदर अस्पताल की व्यवस्था दुरुस्त होती तो इसकी जरूरत ही नहीं पड़ती. मोबाइल की रोशनी में घायल की हो रही थी मरहम-पट्टी : सामाजिक विचार मंच के संयोजक कंवलजीत सिंह ने बताया कि अभी हाल ही में एक परिचित दुर्घटना में घायल हो गये थे. रात के समय सदर अस्पताल अंधेरे के आगोश में समाया था. वहां मोबाइल की रोशनी में घायल की मरहम पट्टी की जा रही थी. इसकी तस्वीर भी कुछ लोगों ने सोशल मीडिया में डाला था. बड़ी तकलीफ होती है इस अव्यवस्था को देख कर. अधिकारियों, कर्मचारियों का रुखा व्यवहार : मुक्तिधाम समिति के मनोज गुप्ता मन्ना ने बताया कि अक्सर सड़क दुर्घटना में घायलों को लेकर सदर अस्पताल जाते हैं तो वहां की स्थिति देखकर काफी तकलीफ होती है. स्वास्थ्य मंत्री बड़े-बड़े दावे करते हैं. लेकिन जमीनी हकीकत देखनी है तो सदर अस्पताल आइये. यहां अस्पताल का कोई लक्षण है ही नहीं. स्वच्छता का घोर अभाव है. अधिकारियों, कर्मचारियों का रुखा व्यवहार आपको और बीमार कर देगा.

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By Shailesh ambashtha

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