आम बागवानी से आत्मनिर्भर बनीं शुक्रमणि उरांव

प्रखंड के गुड़ी पंचायत अंतर्गत किसान बादो उरांव की पत्नी शुक्रमणि उरांव ने आम बागवानी के जरिये न सिर्फ अपने परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया.

कैरो. प्रखंड के गुड़ी पंचायत अंतर्गत किसान बादो उरांव की पत्नी शुक्रमणि उरांव ने आम बागवानी के जरिये न सिर्फ अपने परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी एक मिसाल कायम की है. महिला मंडल से जुड़कर उन्होंने प्रदान संस्था के माध्यम से वर्ष 2011-12 में आम बागवानी की शुरुआत की थी. शुक्रमणि ने बताया कि संस्था से प्रेरित होकर उन्होंने अपने दो एकड़ जमीन पर आम के पौधे लगाये. शुरुआत में जब पौधे छोटे थे और आमदनी नहीं हो रही थी, तो थोड़ी निराशा जरूर हुई. लेकिन विशेषज्ञों की सलाह पर उन्होंने खाली जगह में अन्य फसलें लगायीं और तीन वर्ष तक आम के पौधों को मजबूती देने के लिए फल नहीं लगने दिया. चौथे वर्ष से आम का उत्पादन शुरू हुआ, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी होने लगी. वर्तमान में उनके बागान में दशहरी, आम्रपाली, लँगड़ा, चौसा और मालदा किस्मों के लगभग 240 पौधे हैं. इससे उन्हें हर वर्ष करीब ढाई से तीन लाख रुपये की आय हो जाती है. उन्होंने कहा कि अब वह अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में शिक्षा दिला पा रही हैं. बड़ी बेटी इंटर पास कर रांची में आगे की पढ़ाई कर रही है, जबकि एक बेटा और दो बेटियां ईरगांव के निजी विद्यालय में पढ़ाई कर रहे हैं. शुक्रमणि कहती हैं कि बागवानी से जुड़ने के बाद उनका जीवन स्तर काफी सुधरा है और अब उन्हें रोजमर्रा के खर्चों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. शुक्रमणि अपने अनुभवों को साझा करते हुए अन्य महिलाओं को भी आम बागवानी अपनाने की प्रेरणा देती हैं. उन्होंने कहा कि यदि मन में हौसला और मेहनत करने का जज़्बा हो, तो महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं.

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By ANUJ SINGH

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