कुड़ू लोहरदगा : बरवा टोली कुड़ू में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन भक्तिभाव और उत्साह के साथ किया गया. गुरुवार को यज्ञाचार्य रामाकांत शास्त्री ने यजमानों को विधि-विधान से पूजा-अर्चना कराई. शुक्रवार को सैकड़ों श्रद्धालु महायज्ञ मंडप पहुंचे और परिक्रमा करते हुए सुख-समृद्धि की कामना की. कथावाचक प्रभु दास जी महाराज ने बताया कि शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार यज्ञ स्थल की परिक्रमा करने से पापों का नाश होता है और हर कदम के साथ व्यक्ति के पूर्व जन्मों के पाप मिटते हैं. सच्ची निष्ठा से परिक्रमा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. यज्ञ की परिक्रमा से मानसिक शांति और स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होता है. यज्ञशाला की परिक्रमा करने से मन को शांति मिलती है और तनाव कम होता है. साथ ही, यज्ञ के धुएं में मौजूद औषधीय गुणों के संपर्क से शारीरिक कष्टों से राहत मिलती है. धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि यज्ञ मंडप की परिक्रमा करने से चारों धाम की यात्रा के समान पुण्य फल मिलता है. नियमित परिक्रमा से दीर्घायु और निरोगी जीवन की प्राप्ति होती है. इस अवसर पर यज्ञाचार्य रामाकांत शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया. उन्होंने बताया कि जन्म के बाद कंस ने पूतना नामक राक्षसी को भेजा, जो वेश बदलकर विषैले दूध से कृष्ण को मारना चाहती थी, लेकिन भगवान ने उसका वध कर दिया. इसके बाद कार्तिक माह में ब्रजवासी इंद्र पूजन की तैयारी करते हैं, परंतु श्रीकृष्ण उन्हें गोवर्धन महाराज की पूजा करने की प्रेरणा देते हैं. इससे क्रोधित होकर इंद्र भारी वर्षा करते हैं. संकट में पड़े ब्रजवासियों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सबको आश्रय देते हैं. अंततः इंद्र पराजित होकर वर्षा रोक देते हैं और ब्रज में जयकारे गूंज उठते हैं.
जिस पर भगवान की कृपा होती है, उसको किसी ना किसी रूप में मिल जाते हैं - आचार्य प्रभु दास जी महाराज
बरवा टोली कुड़ू में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन भक्तिभाव और उत्साह के साथ किया गया.
