लोहरदगा़ व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित सभाकक्ष में मोटर एक्सीडेंट क्लेम केसेस को लेकर मंगलवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष डालसा राजकमल मिश्रा, डालसा सचिव राजेश कुमार, एसडीओ अमित कुमार तथा रिसोर्स पर्सन जेपीएन सिन्हा ने दीप प्रज्वलित कर किया. पीडीजे सह अध्यक्ष डालसा ने कार्यशाला में उपस्थित पुलिस अधिकारियों को एफआइआर (प्रथम दुर्घटना रिपोर्ट) और मुआवजा आवेदन की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि दुर्घटना के बाद सभी कार्रवाई का सही अनुपालन करना अनिवार्य है. एसडीओ अमित कुमार ने पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे से संबंधित विभिन्न विभागों की जानकारी दी. लाभुकों को योजनाओं की जानकारी दी : एमवीआइ ने सड़क दुर्घटना से संबंधित लाभुक योजनाओं और कैशलेस चिकित्सा की जानकारी दी तथा घायल को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाने पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के बारे में बताया. रिसोर्स पर्सन आसिब मिंज ने वाहनों का बीमा अनिवार्य होने और इसके लाभ पर प्रकाश डाला. रिसोर्स पर्सन जेपीएन सिन्हा ने डीएआर और आइएआर की प्रक्रिया, दुर्घटना कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मिलने वाले मुआवजे के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि मुआवजा राशि आयु, आय, आश्रित एवं विवाहित-अविवाहित स्थिति के आधार पर निर्धारित की जाती है. लोगों में मोटर वाहन दुर्घटना को लेकर जागरूकता की कमी : डालसा सचिव ने बताया कि यदि वाहन चालक दुर्घटना के बाद फरार हो जाता है तो मृतक के आश्रित को दो लाख और घायल को 50 हजार रुपये मुआवजा मिलेगा, जिसका आवेदन एसडीओ के पास किया जाता है. उन्होंने कहा कि लोगों में मोटर वाहन दुर्घटना को लेकर जागरूकता की कमी है, इसलिए जागरूकता फैलाना आवश्यक है. कार्यशाला में सदर अस्पताल के डीएस, एलएडीसीएस के अधिवक्ता, पैनल अधिवक्ता, विभिन्न थानों के पुलिस अधिकारी और पीएलवी उपस्थित थे.
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