लोहरदगा : राज्य में बालू को लेकर जहां हर ओर उथल-पुथल है, वहीं लोहरदगा के लोग भी सरकार के रवैये से परेशान हैं. लोगों का कहना है कि सरकार अपने लाभ के लिए कारपोरेट घराने को बालू का ठेका देने पर आमादा है. इस मुद्दे पर लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
जिला परिषद उपाध्यक्ष मनीर उरांव का कहना है कि पहले तो झारखंड में सरकार नाम की कोई चीज ही नहीं है.
यहां के मुख्यमंत्री क्या बोलते हैं, क्या करते हैं शायद उन्हें भी पता नहीं होता है. झारखंड विश्व में ऐसा एकलौता राज्य है जहां का मंत्री हथियारों का सौदागर हैं. यदि यह सरकार बड़ी कंपनियों के हाथों बालू बेच दे रही है तो ये आश्चर्य की बात नहीं है. बालू तो पंचायतों के अधीन ही रहना चाहिए.
राजीव गांधी ब्रिगेड कांग्रेस के प्रदेश सचिव मनोज साहू का कहना है कि पंचायतों को बालू की जिम्मेवारी मिलनी चाहिए. आराहांसा निवासी अनिल देव का कहना है कि बालू एक गंभीर मुद्दा है. इससे लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है. इस पर सरकार को तत्काल निर्णय लेते हुए बालू घाटों पर पंचायत को अधिकार दे दिया जाना चाहिए. अग्रवाल सभा के प्रवक्ता कुणाल अभिषेक का कहना है कि बालू घाट को ग्राम सभा के हवाले कर दिया जाये.
आजसू पार्टी के जिलाध्यक्ष आलमीन अंसारी का कहना है कि बालू को लेकर जो बातें सामने आ रही है उसके अनुसार महानगरों के कारपोरेट घरानों के हाथों हेमंत सरकार बिक चुकी है. झाविमो के हाजी सज्जाद खान का कहना है कि सरकार पूंजीपतियों के हाथों बिक चुकी है. सेन्हा प्रखंड निवासी कांग्रेसी नेता अनिल उरांव का कहना है कि बालू घाटों पर पंचायतों का ही अधिकार होना चाहिए. भाजपा नेता राज मोहन राम का कहना है कि यह सरकार तो लूटपाट के लिए ही बनी है. बालू को लेकर सरकार के द्वारा राज्य में अशांति फैलाने का काम किया जा रहा है.
