भंडरा में 58 साल पुरानी परंपरा, दुर्गा पूजा की भव्यता हर साल बढ़ रही

भंडरा में 58 साल पुरानी परंपरा, दुर्गा पूजा की भव्यता हर साल बढ़ रही

भंडरा़ प्रखंड मुख्यालय बस्ती में दुर्गा पूजा का इतिहास 58 साल पुराना है. वर्ष 1967 में तत्कालीन थानेदार डी. लाल ने स्थानीय ग्रामीण स्व जगनिवास शर्मा, स्व गौरी नंदन शर्मा और शिक्षक गोवर्धन अधिकारी के सहयोग से पूजा की शुरुआत की थी. प्रारंभ में पूजा साधारण झोपड़ीनुमा पंडाल में होती थी, लेकिन आज यह भव्य पंडाल और विद्युत सज्जा से सुसज्जित होता है. बीच के वर्षों में पूजा दो जगहों पर हुई, लेकिन लंबे समय तक नवयुवक संघ द्वारा एक ही स्थान पर आयोजन होता रहा. पिछले पांच वर्षों से सिद्धिदायनी दुर्गा मंदिर निर्माण समिति द्वारा मंदिर परिसर में ही पूजा का आयोजन किया जा रहा है. अब स्थानीय लोगों के सहयोग से पंडाल की भव्यता और पूजा में रौनक लगातार बढ़ रही है. 1983 से समिति ने रावण दहन की परंपरा शुरू की : साल 1983 से समिति ने ठाकुरबाड़ी प्रांगण में रावण दहन की परंपरा भी शुरू की. इस अवसर पर आकर्षक आतिशबाजी और पटाखों का प्रदर्शन होता है. पहले स्व गौरी नंदन शर्मा द्वारा रामलीला भी करायी जाती थी. रावण दहन देखने आसपास के गांवों से काफी संख्या में लोग पहुंचते हैं. इस वर्ष भंडरा में नवयुवक संघ दुर्गा पूजा समिति और सिद्धिदायनी दुर्गा मंदिर समिति के साथ-साथ भौरो, मसमानो और बेदाल में भी पूजा पंडाल बनाये जा रहे हैं. वहीं, चट्टी स्थित मां छत्तीस देवी मंदिर में जगतपाल साहू द्वारा नवरात्र पाठ कराया जाता है. प्रखंड के अकाशी और भीठा गांवों में नवमी के दिन भैंस बलि की परंपरा है, जिसे देखने काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. भंडरा में दुर्गा पूजा अब सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव का बड़ा केंद्र बन चुका है.

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By SHAILESH AMBASHTHA

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