लोहरदगा : लोहरदगा सदर अस्पताल रेफर अस्पताल बन कर रह गया है. यहां लाये गये मरीजों को सिर्फ रेफर किया जाता है, चाहे वह दुर्घटना से ग्रसित मरीज हो या फिर प्रसव के लिए लायी गयी महिला हो.
ऐसा ही मामला विगत दिनों अरकोसा के निवासियों ने बताया. मरीज के परिजन रामजन्म सिंह, विजय कुमार, रामचंद्र उरांव, अंगद महतो, दीपनारायण सिंह, तपेश्वर प्रजापति ने बताया कि अरकोसा निवासी तपलू वर्मा अपनी 30 वर्षीय बहन सुचिता देवी को प्रसव के लिए शनिवार को सदर अस्पताल में तीन बजे रात्रि में लाया.
डॉक्टरों द्वारा कोई इलाज न कर रविवार को दस बजे रात में रांची रिम्स के लिए रेफर कर दिया गया. परिजनों ने बताया कि महिला का नॉर्मल प्रसव होने की बात कह कर डॉक्टरों ने घंटों सदर अस्पताल में रखा. बाद में मरीज के लिए खून की मांग डॉक्टरों ने की. खून न मिलने की स्थिति में सदर अस्पताल रांची रेफर कर दिया. मरीज के परिजन जब तक महिला को रिम्स पहुंचा पाते, रिम्स गेट के पास ही महिला की मौत हो गयी.
अरकोसा निवासी राजेश्वर महतो की 30 वर्षीय पत्नी को सोमवार की सुबह सदर अस्पताल लाया गया. लगभग 11 बजे डॉक्टर ने इसकी जांच करते हुए खून की कमी बताया. साथ ही डॉक्टरों ने बताया कि बच्च मां के पेट में ही पैखाना कर दिया है जिससे जच्च बच्च के जान को खतरा है. इन्हें भी आठ घंटे बाद रिम्स के लिए रेफर कर दिया गया. परिजन आर्थिक रुप सक्षम न होने के कारण मरीज को लोहरदगा स्थित उसरुला हास्पिटल ले गये, जहां सामान्य प्रसव कराया गया. जच्च-बच्च दोनों सलामत हैं.
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि सदर अस्पताल में डॉक्टरों ने 1300 रुपये का दवा खरीदवाया. यही दवा उसरुला हॉस्पीटल में दिखाया गया. जिसमें मात्र 450 रुपये की दवा मरीज को दिया. बाकी दवा परिजन दवा दुकान में वापस करने के लिए परेशान हैं.
जांच कर कार्रवाई करेंगे : सीएस
इस संबंध में पूछे जाने पर सिविल सजर्न एमएम सेनगुप्ता का कहना है कि इस प्रकार की रिपोर्ट हमें नहीं मिली. रिपोर्ट मिलते ही जांच करेंगे और दोषी डॉक्टरों पर कार्रवाई करेंगे. उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल में सभी प्रकार का ऑपरेशन मुफ्त किया जा रहा है. यहां कार्यरत डॉक्टर भी अपनी ड्यूटी कर रहे हैं. कभी कभी प्रसव के संबंध में नॉर्मल केसेज भी एबनॉर्मल हो जाते हैं, जिसके कारण डॉक्टर एहतियात के तौर पर रेफर करना उचित समझते हैं.
