लोहरदगा. वायुयान के इस युग में किसी की साइकिल की भी चाहत पूरी नहीं हुई. कभी नगर पर्षद के मुखिया थे और दूसरे टर्म में जनता की सेवा करने से जनता ने ही रोक दिया. उस समय फुलवाली पार्टी के साथ थे. नगर पर्षद का चुनाव हारने के बाद जेवीएम के साथ गये. लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जगी. आजसू का दामन थाम लिये, लेकिन ऐन वक्ता पर सिंबल नहीं मिला. निराश हुए लेकिन हिम्मत नहीं हारे और फिर से उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री की पार्टी से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी. घोषणा को हकीकत में बदलने के लिए निर्वाची पदाधिकारी के पास समाजवादी पाटी के नाम पर परचा भी दाखिल कर दिया, लेकिन जब स्कु्रटनी हुई तो मालूम हुआ कि समाजवादी पार्टी का सिर्फ नाम है सिंबल तो है ही नहीं. निर्वाची पदाधिकारी ने निर्दलीय के रुप में चुनाव चिह्न केतली आवंटित कर दिया. मामला कहां गड़बड़ाया यह जांच का विषय है, लेकिन बाजार में चर्चा है कि सिंबल के साथ मोटी रकम एवं डेढ़ हजार साइकिल भी मिलना था. चेहरे पर छायी निराशा को मुस्कुरा कर छुपाने का असफल प्रयास किया जा रहा है.
वायुयान के युग में एक साइकिल भी नहीं मिली
लोहरदगा. वायुयान के इस युग में किसी की साइकिल की भी चाहत पूरी नहीं हुई. कभी नगर पर्षद के मुखिया थे और दूसरे टर्म में जनता की सेवा करने से जनता ने ही रोक दिया. उस समय फुलवाली पार्टी के साथ थे. नगर पर्षद का चुनाव हारने के बाद जेवीएम के साथ गये. लोकसभा चुनाव […]
