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Uttarakhand Glacier Disaster : चमोली में लातेहार के 10 मजदूरों की कैसे बची जान, जानें परिजनों की जुबानी

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
 उत्तराखंड गये लातेहार के मजदूर के परिजन मोती सिंह और संतोष सिंह की पत्नी मुन्नी देवी.
उत्तराखंड गये लातेहार के मजदूर के परिजन मोती सिंह और संतोष सिंह की पत्नी मुन्नी देवी.
प्रभात खबर.

Uttarakhand Glacier Disaster, Jharkhand News, Latehar News, लातेहार (चंद्रप्रकाश सिंह) : लातेहार जिला अंतर्गत सदर प्रखंड के बारियातू खालसा जागीर गांव के 10 मजदूर उत्तराखंड के चमोली से सुरक्षित निकलने पर उनके परिजनों ने भगवान का शुक्रिया अदा किया है. मजदूर देवनाथ सिंह की मां संगीता देवी ने प्रभात खबर को बताया कि काम करने के लिए गेट पास इन मजदूरों का नहीं बना था. गेट पास बनाने के लिए सभी आवश्यक कागजात स्थानीय ठेकेदार को दे दिया गया था. गेट पास बनने की इंतजार में समय व्यतीत करने के लिए सभी मजदूर आपस में ताश खेलने लगे और इसी दौरान यह घटना घटी.

मजदूर देवनाथ सिंह की मां संगीता देवी ने कहा कि फोन पर पिछले रविवार को बात हुई थी. इस दौरान बताया गया था कि गेट पास नहीं बना है. इसलिए हमलोग ताश खेल रहे थे. तभी लगभग 11 बजे पहाड़ टूटने की आवाज सुनायी दी. इसके बाद हर तरफ पानी का सैलाब दिखा. देवनाथ समेत अन्य मजदूर घटनास्थल से काफी दूर थे, इसलिए स्थानीय प्रशासन ने उसी दिन सुरक्षित निकाल लिया.

वहीं, योगेश्वर सिंह की पत्नी सरोजनी देवी ने बताया कि इस साल घर की मरम्मती कराये थे. इस कारण कर्ज बहुत हो गया था. कर्ज चुकाने की नियत से बाहर कमाने गये. पड़ोसियों से इस बात की जानकारी मिली कि वहां एक बड़ी घटना घटी है, लेकिन भगवान ने उनके 2 बच्चों को अनाथ होने से बचा लिया.

सेवानिवृत रेलकर्मी मोती सिंह के 5 पुत्र में से 3 पुत्र रूपलाल सिंह, अंकित सिंह एवं चंदन सिंह चमोली गये थे. रूपलाल सिंह और अंकित सिंह शादीशुदा हैं. मोती सिंह ने बताया कि परिवार होने के कारण पेंशन से गुजारा नहीं हो पाता है. रूपलाल की पत्नी ममता देवी और अंकित की पत्नी सोनी देवी ने बताया कि घटना के दिन बात हुई थी. सभी सुरक्षित हैं. हमलोगों ने भगवान का शुक्रिया अदा कर उनकी लंबी उम्र की कामना की.

संतोष सिंह के पिता नंदकिशोर सिंह ने बताया कि वह पहली बार बाहर गया है. पत्नी मुन्नी देवी ने बताया कि फोन से बताया हुई है. उन्होने कहा कि सुरक्षित हैं. एक- दो दिन में लौट जायेंगे. सत्येंद्र की मां कमली देवी घर के बाहर काम कर रही थी. अपने तीन में से सबसे बड़े पुत्र की सूचना पाकर एक बार दुखी हुई थी, लेकिन उसने बताया कि घर का खर्चा खेती- मजदूरी से ही चलता है. गांव के दोस्तों के साथ घर की आर्थिक स्थिति को ठीक करने के लिए 20 हजार रूपया महीना मजदूरी की लालच में सत्येंद्र बाहर गया है. भगवान ने हमारे घर के बड़े चिराग को बुझने से बचा लिया. इसके अलावा अन्य मजदूरों के परिजनों ने भी भगवान का आभार जताया है.

लातेहार से चमोली गये मजदूर

सभी मजदूर 3 माह पूर्व ही चमोली गये थे. इनमें रूपलाल सिंह, अंकित सिंह एवं चंदन सिंह पिता मोती सिंह, योगेश्वर सिंह पिता उपेंद्र सिंह, संतोष सिंह पिता नंदकिशोर सिंह, देवनाथ सिंह पिता कामेश्वर सिंह, सत्येंद्र सिंह पिता विश्वनाथ सिंह, अमलेश उरांव पिता धीरन उरांव, आनंद सिंह पिता राजेद्र सिंह तथा छठनू सिंह पिता डोमन मुख्य हैं.

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