इतनी संपदा, फिर भी रोटी के लाले

– एम शमीम – बालूमाथ : एकीकृत बालूमाथ प्रखंड को प्रकृति ने अनुपम उपहारों से नवाजा है. इसके बावजूद प्रखंड का अपेक्षित विकास नहीं हो पाना कचोटता है. कोयला और बॉक्साइट के अलावा यहां फायरक्ले, क्वाट्र्ज एवं फेलेस्पर भी पाये जाते हैं. बाजारों में यहां से उत्पादित होनेवाले फायरक्ले, क्वाट्र्ज व फेलेस्पर के कन्साइन की […]

– एम शमीम –

बालूमाथ : एकीकृत बालूमाथ प्रखंड को प्रकृति ने अनुपम उपहारों से नवाजा है. इसके बावजूद प्रखंड का अपेक्षित विकास नहीं हो पाना कचोटता है. कोयला और बॉक्साइट के अलावा यहां फायरक्ले, क्वाट्र्ज एवं फेलेस्पर भी पाये जाते हैं.

बाजारों में यहां से उत्पादित होनेवाले फायरक्ले, क्वाट्र्ज फेलेस्पर के कन्साइन की मांग बहुत अधिक है. पिछले 19 माह से प्रखंड की आर्थिक रीढ़ कहे जानेवाले बालूमाथ, हेरहंज, बारियातु प्रखंड से संबंधित इन खनिजों की खदानें बंद पड़ी हैं. दर्जनों खनन परियोजनाओं के बंद होने से आर्थिक गतिविधियां शिथिल पड़ी है. इसकी सुधि लेनेवाला भी कोई नहीं है.

इन खदानों से जुड़े माइंस ऑनर, मैनेजर, मुंशी समेत अन्य स्टॉफ के साथ कच्चे माल की ढुलाई करनेवाले वाहन मालिकों, चालकों, उप चालकों के अतिरिक्त माइंस में काम करनेवाले मजदूर एवं प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े लगभग 50 हजार लोगों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है.

इस आर्थिक संकट से उत्पन्न स्थिति ने काफी संख्या में मजदूरों को पलायन के लिए मजबूर किया है. साथ ही राज्य एवं केंद्र सरकार को रॉयल्टी के रूप में मिलने वाले राजस्व के करोड़ों रुपयों का नुकसान उठाना पड़ रहा है. सूत्रों के अनुसार यह राजस्व हानि प्रतिदिन लाखों में है. बाजार में व्यवसाय बुरी तरीके से प्रभावित है. इसका असर समाज के लगभग सभी वर्गों पर पड़ रहा है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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