4कोडपी5 फिरोज हयात खान. प्रतिनिधि जयनगर. रमजान का पवित्र महीना न केवल मुसलमानों के लिए आत्मिक नवीनीकरण का साधन है, बल्कि यह पूरी मानवता को इस्लाम के सार्वभौमिक संदेश भाईचारे, दया और न्याय से परिचित कराता है. रमजान की सबसे प्रमुख शिक्षा मानवीय समानता है. उक्त बातें नेक्सजेन हुंडई कंपनी के शाखा प्रबंधक ( झुमरी तिलैया) फिरोज हयात खान ने रमजान की महता पर प्रकाश डालते हुए कही. उन्होंने कहा कि इफ्तार के दस्तरख्वान पर अमीर-गरीब, काले-गोरे का भेद मिट जाता है. इस्लाम इस बात पर जोर देता है कि सभी मनुष्य सम्मान के हकदार हैं. कुरआन में अल्लाह फरमाता है, ””””””””हमने तुम्हें एक पुरुष और एक स्त्री से पैदा किया और तुम्हें जातियों और कबीलों में बांटा ताकि तुम एक-दूसरे को पहचानो. अल्लाह के नजदीक तुममें सबसे अधिक परहेजगार हो इस्लाम यह स्पष्ट करती है कि इस्लाम नस्ल, रंग या वर्ग के आधार पर भेदभाव को खारिज करता है. रमजान में जकात और दान का तंत्र इसी सामाजिक न्याय की जीवंत मिसाल है, जो आर्थिक असंतुलन को कम करता है. रोजा इंसान को दूसरों के दुख को समझने की शिक्षा देता है. इस्लाम की यह शिक्षा केवल मुसलमानों तक सीमित नहीं. कुरआन में निर्देश है, और अल्लाह की मुहब्बत में मिस्कीन, यतीम और कैदी को खाना खिलाओ. रमजान में मुसलमान हर ज़रूरतमंद की मदद करते हैं, जो इस्लाम के दया के संदेश को उजागर करता है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
