धन रहने से धर्म करने का भाव भी आता है : मुनि श्री

परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री 108 धर्म सागर जी महाराज, मुनि श्री 108 भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन नया मंदिर में मुनिश्री का अभिषेक और शांतिधारा की गयी

झुमरीतिलैया. परम पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री 108 धर्म सागर जी महाराज, मुनि श्री 108 भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में प्रातः काल की बेला में श्री दिगंबर जैन नया मंदिर में मुनिश्री का अभिषेक और शांतिधारा की गयी. इसके बाद विशेष मांगलिक, पूजन आदि क्रियाएं संपन्न हुई. महिला वर्ग एवं पुरुष वर्ग ने गुरु के हाथों में शास्त्र अर्पण का सौभाग्य प्राप्त किया. परम पूज्य मुनि श्री 108 धर्म सागर जी महाराज ने अपने हाथों से केशलौच किया. अपने हाथों से बाल को उखाड़ने का जैन संत के अपने क्रियाओं में एक नियम है जिसे 2 महीना में एक बार करना पड़ता है. धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री 108 भावसागर जी महाराज ने कहा कि धार्मिक क्रियाओ में सभी को आगे करना चाहिए, चंवर ढुलाने का आरती करने का भी अवसर महिलाओं को प्रदान करना चाहिए. पुरुष वर्ग को घर की महिलाओं के लिए बालक, बालिकाओं के लिए उनके खर्च के लिए धन देना चाहिए, जिससे वह भी दान कर सकें. धन रहने से धर्म करने का भाव भी आता है. मीडिया प्रभारी राजकुमार जैन अजमेरा ने जानकारी दी कि 15 मई को श्री शांतिनाथ भगवान का जन्म, तप, मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाया जायेगा. 16 मई को समाधिस्थ परम पूज्य आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज का समाधि स्मृति महोत्सव भी मनाया जायेगा.

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By VIKASH NATH

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