ट्रेन यात्रियों को साधु का वेष धरकर लूटने वाला गिरोह गिरफ्तार

धनबाद आसूचना शाखा (सीआईबी) और जीआरपी की संयुक्त टीम ने हाल ही में एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को साधु या फकीर का वेष धरकर नशाखुरानी का शिकार बनाता था.

कोडरमा.

धनबाद आसूचना शाखा (सीआईबी) और जीआरपी की संयुक्त टीम ने हाल ही में एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को साधु या फकीर का वेष धरकर नशाखुरानी का शिकार बनाता था. इस गिरोह के सात सदस्य-धूमी, रज्जाक जोगी, राजू, पहाड़ी, कृपाल, सुनील और मूला उर्फ रामचंद्र सभी उत्तर प्रदेश के अमेठी निवासी हैं. इनके पास से नशीली दवाइयां, धार्मिक प्रतीकात्मक सामान जैसे ताबीज, माला, कमंडल, भगवा गमछा, पीतल की मूर्ति, नकद 5,050 और चार मोबाइल बरामद किये गये.

घटना का खुलासा

10-11 मार्च को गाड़ी संख्या 20975 (चंबल एक्सप्रेस) में धनबाद से बांदा की यात्रा कर रही महिला शिवानी (30 वर्ष) को एक अज्ञात साधु ने प्रसाद के नाम पर लड्डू में नशीली दवा मिलाकर खिला दी. महिला बेहोश हो गयी और आरोपी उसका पर्स, जिसमें लगभग ₹4,000 नकद था, तथा पैरों में पहनी चांदी की पायल और बिछिया लेकर फरार हो गया. महिला को उसके पति ने बांदा स्टेशन पर उतारा और जिला अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन इलाज के दौरान 15 मार्च को उसकी मृत्यु हो गयी.

जांच की प्रक्रिया

शिकायत दर्ज होने के बाद जीआरपी ने मामले को गंभीरता से लिया. सबसे पहले धनबाद स्टेशन का सीसीटीवी फुटेज खंगाला गया, फिर आसनसोल और बर्धवान के फुटेज में साधु वेष में पांच लोग ट्रेन में चढ़ते हुए दिखाई दिये. जांच से पता चला कि ये लोग काली पहाड़ी स्टेशन से लोकल ट्रेन पकड़कर आसनसोल और बर्धवान पहुंचे थे. घटना के बाद गिरोह डीडीयू स्टेशन पर उतरा और बनारस कैंट की ओर गया. वहां के सीसीटीवी में भी ये लोग बनारस–लखनऊ शटल एक्सप्रेस में चढ़ते हुए दिखे.

टीम ने मोबाइल लोकेशन ट्रैक किया तो पता चला कि आरोपी आसनसोल के पास काली पहाड़ी स्टेशन के दक्षिण में तंबू लगाकर अस्थाई रूप से रहते हैं. उनकी पहचान की गयी और रेकी के बाद 31 मार्च को आसनसोल–गया पैसेंजर ट्रेन में पीछा करते हुए कोडरमा में सभी सातों को गिरफ्तार कर लिया गया.

अपराध का पैटर्न

जांच में सामने आया कि यह गिरोह मांगता जाति का है और कभी साधु तो कभी फकीर का भेष धरकर भोले-भाले यात्रियों को धोखा देता था. प्रसाद, ताबीज या आशीर्वाद के नाम पर नशीली चीजें खिलाकर यात्रियों को बेहोश कर देता और फिर उनके पैसे व गहने लूट लेता. धार्मिक आस्था का फायदा उठाकर यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था.

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Published by: Vikash nath

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