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Jharkhand News:वृक्षों को रक्षासूत्र बांधकर बोले सिद्धार्थ त्रिपाठी, झारखंड ग्रामीण विकास का मॉडल है सिमरकुंडी

2007 से हर वर्ष 25 दिसंबर को ग्रामीणों द्वारा वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधकर वन की सुरक्षा का संकल्प लिया जाता है. मुख्य वन संरक्षक (अनुसंधान) सिद्धार्थ त्रिपाठी ने कहा कि वन विभाग की मदद से सिमरकुंडी में ग्रामीण विकास का मॉडल तैयार हुआ है.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand News: वन देवी की पूजा करते सिद्धार्थ त्रिपाठी व अन्य
Jharkhand News: वन देवी की पूजा करते सिद्धार्थ त्रिपाठी व अन्य
प्रभात खबर

Jharkhand News: झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच वन प्रक्षेत्र के सिमरकुंडी ग्राम वन सुरक्षा समिति के तत्वाधान में शनिवार को सिमरकुंडी जंगल में पेड़ों की रक्षा को लेकर रक्षाबंधन का पर्व मनाया गया. यहां पर पर्यावरण संरक्षण के लिए रक्षाबंधन पर्व की शुरूआत वर्ष 2007 में तत्कालीन वन प्रमंडल पदाधिकारी सिद्धार्थ त्रिपाठी ने की थी. तब से आज तक प्रति वर्ष 25 दिसंबर को यहां ग्रामीणों द्वारा वृक्षों को रक्षा सूत्र बांधकर वन की सुरक्षा का संकल्प लिया जाता है. मुख्य वन संरक्षक (अनुसंधान) सिद्धार्थ त्रिपाठी ने कहा कि वन विभाग की मदद से सिमरकुंडी में ग्रामीण विकास का जो मॉडल तैयार हुआ है, वह प्रेरणादायक है. ग्रामीण श्रमदान कर गांव में उपलब्ध स्रोतों से न केवल विकास का कार्य करते हैं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर अवैध कटाई पर भी रोक लगा रहे हैं. यह सराहनीय है.

सिद्धार्थ त्रिपाठी ने कहा कि 10-15 वर्ष पूर्व जो जंगल काटा जाता था उसे बचाने के लिए मिलकर कार्य किया गया और 2007 से उन्होंने वन की सुरक्षा का संकल्प लिया उसका परिणाम है कि सिमरकुंडी का जंगल घना हो गया है. सिमरकुण्डी का वन एक आदर्श वन स्थापित हो गया. उन्होंने ग्रामीण एवं वन विकास के सहभागिता मॉडल पर जोर दिया. विजय शंकर दूबे ने कहा कि जंगज जीवन का मूल होता है. जंगल से न सिर्फ प्राण वायु मिलती है, बल्कि हमें पीने के लिए पानी भी मिलता है. उन्होंने सिमरकुंडी के ग्रामवासियों द्वारा किए जा रहे वन सुरक्षा कार्यों की प्रशंसा की.

एसपी कुमार गौरव ने कहा कि हमें सिमरकुंडी मॉडल से सीखने की जरूरत है कि किस तरह से वन संरक्षण को अपने जीवन से जोड़ा जाए तथा उसे अपने जीवनशैली का हिस्सा बनाया जाए. इससे न केवल वर्त्तमान पीढ़ी, बल्कि आगे की पीढ़ी भी अच्छे से जीवन यापन कर सकेगी. डीएफओ सूरज कुमार सिंह ने कहा कि सिमरकुंडी के ग्रामीणों द्वारा किए गए वन सुरक्षा का कार्य के लिए सिमरकुंडी को पुरस्कृत भी किया गया है, जो वन समिति के लिए उदाहरण है. वन प्रशासन हर वक्त हर स्थान पर हमेशा नहीं रह सकता, इसलिए ग्रामीणों एवं वन समितियों की सहभागिता बहुत आवश्यक है.

डीडीसी ने कहा कि ग्रामीणों ने जो मिसाल पेश किया है. उससे हम सभी को सीखने की जरूरत है. सिमरकुंडी ग्राम के और विकास के लिए जो भी संभव हो सकेगा वह किया जाएगा. कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों व अतिथियों ने वृक्षों में रक्षासूत्र बांधकर वन एवं पर्यावरण की सुरक्षा का संकल्प लिया. बाद में अधिकारियों ने यहां विकास कार्यों का जायजा भी लिया. मौके पर प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, वन क्षेत्र पदाधिकारी, पर्यावरणविद सुरेन्द्र कुमार, मनोज कुमार, वन समिति के सदस्य व ग्रामीण मौजूद थे. कार्यक्रम की शुरुआत ढोल की थाप पर नृत्य के साथ हुई. अतिथियों व ग्रामीणों ने वनदेवी के स्थान पर पहुंचचकर पूजा की. साथ ही कविता व गीत के माध्यम से वन सुरक्षा एवं संवर्द्धन का संदेश दिया.

रिपोर्ट: विकास

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