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तिलैया में एक साथ दिखे विलुप्त प्राय: गिद्ध, लॉकडाउन के बाद बदले परिवेश के अच्छे संकेत मिलने की संभावना

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand news : काफी दिनों बाद झुमरीतिलैया में गांधी स्कूल के पीछे करीब 70 गिद्ध एक साथ दिखे.
Jharkhand news : काफी दिनों बाद झुमरीतिलैया में गांधी स्कूल के पीछे करीब 70 गिद्ध एक साथ दिखे.
विजय शर्मा.

Jharkhand news, Koderma news : कोडरमा (विकास) : वैश्विक महामारी कोरोना (Coronavirus pandemic) को लेकर दुनिया भर के साथ लंबे समय से भारत में भी लॉकडाउन (Lockdown in india) है, तो इसका असर प्रकृति पर दिख रहा है. खासकर प्रकृति के बीच रहकर पलने- बढ़ने वाले जीव- जंतुओं पर इसका सकारात्मक असर देखने को मिला है. अब तक विलुप्त प्राय: माने जाने वाले गिद्ध भी अब एक साथ झुंड में दिख रहे हैं.

गुरुवार सुबह को झुमरीतिलैया के गांधी स्कूल के पीछे वाले हिस्से में एक साथ 60-70 की संख्या में गिद्ध दिखे. वन विभाग की मानें, तो इससे पहले भी चंदवारा के करौंजिया के आसपास गिद्धों का झुंड दिखा था. यह मानव समाज के लिए अच्छा संकेत है. ऐसे में गिद्धों के संरक्षण को लेकर अब वन प्रमंडल, कोडरमा विशेष योजना बनाने की तैयारी में है. यही नहीं, गिद्धों को आसानी से खाना-पीना मिले इसके लिए वल्चर रेस्टोरेंट (Vulture Restaurant) बनाने की बात पर भी विचार हो रहा है.

जानकारी के अनुसार, प्रकृति पर बढ़ते मानव की दखलअंदाजी एवं घातक दवाइयों आदि के प्रयोग के बाद से गिद्धों समेत अन्य पशु- पक्षियों के जीवन पर वर्षों पूर्व संकट खड़ा हो गया. इसके बाद से लगातार गिद्धों की संख्या में गिरावट दर्ज की गयी है. जानकार बताते हैं कि आसपास के इलाकों में लंबे समय से एक साथ गिद्धों का झुंड नहीं दिखा है.

झुमरीतिलैया में तो करीब 15-20 वर्षों के बाद इस तरह का दृश्य दिखा. यहां एक साथ गिद्ध मृत पशु को खाते दिखे. गिद्ध संरक्षण को लेकर लंबे समय से काम करने वाले हजारीबाग के सत्य प्रकाश बताते हैं कि गिद्धों का झुंड दिखना अच्छा संकेत है, पर यह भी नहीं भूलना चाहिए कि एक समय ऐसा था जब हजारीबाग और आसपास के इलाकों में 250-300 की संख्या में गिद्ध थे. इनके संरक्षण को लेकर ठोस पहल की जरूरत है.

खासकर घातक दवाइयों के प्रयोग पर रोक लगनी चाहिए. मानव पालतू जानवरों के साथ ही अन्य को घातक दवाइयों, इंजेक्शन देता है, पर जब ये मौत के शिकार होते हैं, तो इन्हें खुले जगह पर फेंक दिया जाता है. गिद्धों का यही भोजन है, इसलिए गिद्धों को प्रकृति का स्कैवेंजर (सफाई कर्मी) कहा जाता है. दुर्भाग्य है कि हम प्रकृति की साफ- सफाई को लेकर भी सतर्क नहीं हैं.

हाल में पूरे देश में 10 ऐसे जोन चिह्नित किये गये हैं, जिन्हें वल्चर सेफ जोन (Vulture Safe Zone) माना गया है. इसमें हजारीबाग भी शामिल है. नियमत: किसी सेफ जोन के 100 किलोमीटर की परिधि में गिद्धों की गतिविधि मानी जाती है. इन जगहों पर इन्हें कोई नुकसान न हो इसको लेकर प्रयास किया जा रहा है.

गिद्धों के विलुप्त होने के हैं ये कारण

जानकारी के अनुसार, गिद्धों के विलुप्त होने का कारण इनकी प्रजनन क्षमता में कमी आना माना गया है. पशुओं को दी जाने वाली दवाइयां जैसे डायक्लोफेनाक, एक्सिटोन आदि की वजह से इनकी प्रजनन क्षमता में कमी आयी है. इन दवाओं की वजह से उनके गुर्दो ने काम करना बंद कर दिया था. 1990 तक गिद्ध की 90 प्रतिशत प्रजातियां खत्म हो चुकी थीं. वर्ष 2000 के अकाल के समय पशुओं की मौत असमय हो गयी थी, जिससे इनके लिए भोजन की कमी आ गयी थी. इसके अलावा हवाई दुर्घटनाएं, चक्रवात, टावर की तरंगें आदि के कारण भी इनमें कमी आयी है.

हजारीबाग के तर्ज पर बनेगी संरक्षण की योजना : डीएफओ

वन प्रमंडल, कोडरमा के डीएफओ सूरज कुमार सिंह बताते हैं कि विलुप्त प्राय: गिद्धों का एक साथ दिखना प्रकृति के लिए अच्छी बात है. प्रकृति पर मानव की दखलअंदाजी कम होगी, तो इस तरह के बदलाव जरूर दिखेंगे. बातचीत में उन्होंने कहा कि तिलैया में गिद्धों को देखे जाने की जानकारी प्रभात खबर के माध्यम से मिली है. इससे पहले चंदवारा के इलाके में भी गिद्ध दिखे थे. विभाग जल्द ही हजारीबाग की तर्ज पर गिद्ध संरक्षण योजना (Vulture conservation scheme) कर मुख्यालय को भेजेगा. साथ ही वल्चर रेस्टोरेंट की व्यवस्था भी की जायेगी.

डीएफओ ने बताया कि तिलैया डैम के इलाके में भी विदेशी पक्षियों एवं अन्य प्रजाति के पक्षियों का आगमन होता है. दुर्भाग्य है कि कुछ लोग इन पक्षियों का शिकार करते हैं. गत वर्ष शिकार के एक मामले में कार्रवाई की गयी थी. पक्षियों के शिकार पर रोक लगाने के लिए तिलैया डैम (Tilaiya dam) वाले इलाके में वाच टॉवर (Watch tower) लगाने का प्रस्ताव है. इसको लेकर सारी प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है. नवंबर से पहले वाच टॉवर को शुरू कर स्थानीय वन समिति के माध्यम से शिकारियों पर निगरानी रखी जायेगी.

Posted By : Samir Ranjan.

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