खूंटी. तोरपा के बांदु में रविवार को सरना धर्म सोतोः समिति की दूसरी शाखा का स्थापना दिवस सह सरना धर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया. इस अवसर पर बगरय मुंडा ने कहा कि सरना विश्व का सबसे पुराना धर्म है, जो प्रकृति आधारित है. अब सरना धर्म कोड के लिए राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में जोरदार आंदोलन किया जा रहा है. हर हालत में सरना धर्म कोड जनगणना प्रपत्र में आवंटित करना होगा. उन्होंने आगे कहा कि आजाद भारत में जनजाति समाज के धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक मसले को अनदेखा किया जा रहा है. इस अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष मसीह गुड़िया ने कहा कि सरकार ने प्रकृति महापर्व सरहुल के लिए आगामी 21 मार्च, दिन-शनिवार को सरकारी अवकाश घोषित किया है. उसी दिन अपने-अपने क्षेत्रों में हर्षोल्लास के साथ सरहुल मनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि समाज में पुराने मनमुटाव, आपसी भेद-भाव, ईर्ष्या-द्वेष, व नकारात्मक विचारों को त्याग कर नए फूल व पत्तों की तरह समाज में अच्छाई-सच्चाई, सुख, शांति, खुशहाली, दया, क्षमा, प्रेम व भाईचारा का संचार करें. इससे पहले डॉ सीताराम मुंडा, राजु पहान, सरोज तोपनो, रेशमा मिंजूर, रोवा भेंगरा, सुष्मिता गुड़िया की अगुवाई में अनुयायियों के साथ सरना स्थल में भगवान सिङबोंगा की पूजा-पाठ कर सुख, शांति और खुशहाली की कामना की गयी. मौके पर धर्मगुरु सोमा कंडीर, धर्मगुरु भैयाराम ओड़ेया, मथुरा कंडीर, मुखिया बिमला डोडराय, बाजु मुंडा, रतिया मुंडा, जयपाल हेंबरोम, जीतु पहान, बिरसा तोपनो सहित अन्य उपस्थित थे.
बांदु में सरना धर्म प्रार्थना सभा का आयोजन
सरना धर्म सोतोः समिति की दूसरी शाखा का स्थापना दिवस सह सरना धर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया.
