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झारखंड पंचायत चुनाव : महिलाओं के लिए रिजर्व हुई धनबाद की केशरगढ़ पंचायत, कई समस्याएं आज भी मौजूद

धनबाद की केशरगढ़ पंचायत सामान्य महिलाओं के लिए आरक्षित हो गयी है. पहले यह सीट पुरुषों का था. इस पंचायत में आज भी पेयजल की समस्या मौजूद है. वहीं, संभावित महिला प्रत्याशी भी इसे मुद्दा बनाकर ग्रामीणों के पास जाने लगे हैं.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand news: केशरगढ़ के जमुनिया नदी में मेढ़ बांधकर जमा किया जा रहा पानी.
Jharkhand news: केशरगढ़ के जमुनिया नदी में मेढ़ बांधकर जमा किया जा रहा पानी.
प्रभात खबर.

Jharkhand Panchayat Chunav 2022: धनबाद के बाघमारा प्रखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की सरगर्मी तेज हो गयी है. इस प्रखंड के केशरगढ़ पंचायत में पिछले 10 साल से पुरुषों के लिए सामान्य सीट था, लेकिन इस बार यह सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो गयी. इस पंचायत में अब तक कोई बड़ी योजना धरातल पर नहीं उतरी, वहीं कई समस्याएं आज भी मौजूद है.

पेयजल बना मुद्दा

केशरगढ़ पंचायत महिलाओं के लिए आरक्षित होने के बाद भावी महिला प्रत्याशियों की रेस तेज हो गयी है. सभी इस पंचायत में विकास लाने की बात कहना शुरू कर दिये हैं, वहीं इस पंचायत की एक बड़ी समस्या पेयजल को मुद्दा बनाकर ग्रामीणों के बीच जाने लगे हैं. संभावित महिला उम्मीदवार पेयजल संकट को दूर कराने की चुनावी वादे के साथ दौरा भी शुरू कर दी है.

स्वच्छ पानी की नहीं है कोई व्यवस्था

पंचायत के सदरियाडीह बस्ती में ग्रामीणों के लिए स्वच्छ पानी की कोई व्यवस्था नहीं है. सालों भर ग्रामीण जल संकट झेलते हैं. पानी की जुगाड़ में महिलाओं का दिनभर बीत जाता है. गर्मी में लोगों को नहाने-धोने में भी काफी दिक्कत होती है. इसी समस्या को मुद्दा बनाकर इस बार संभावित प्रत्याशी ग्रामीणों के बीच जाने लगे हैं.

मात्र शोभा बढ़ा रहा यहां का जलमीनार

गांव में लखींद्र महतो, रूपलाल महतो, लखन महतो, संतोष महतो, भैरव महतो, विनोद महतो, तिलक महतो, पुरन महतो, सुरेश रजक, राजू रजक आदि समाजसेवी कहते हैं कि जमुनिया नदी पर मेढ़ बांधकर पानी जमा करते हैं. यही पानी पीने का काम आता है. एक हजार आबादी वाले सदरियाडीह बस्ती में लगभग 150 घर है. पूरे बस्ती में तीन- चार चापाकल है. चापाकल का पानी भी गर्मी में सूख जाता है. बस्ती में पीएचडी विभाग का जलमीनार है, लेकिन ये जलमीनार मात्र शोभा की वस्तु ही बनी हुई है. चुनावी माहौल में संभावित प्रत्याशी अपनी जेब से खर्च कर खराब चापाकल की मरम्मत करवा रहे हैं. ऐसे पेयजल संकट को दूर करने के लिए छह सालों में कोई सार्थक पहल नहीं हुई.

मुखिया ने माना पेयजल संकट

इस संबंध में निर्वतमान पंचायत प्रधान (मुखिया) राजू रजक भी मानते हैं कि इस पंचायत में पेयजल संकट है. कोल बेयरिंग क्षेत्र होने के कारण कोई बड़ी योजना धरातल पर नहीं उतरी. कहा कि जितना फंड मिला, उतना का विकास काम हुआ है. मालूम हो कि केशरगढ़ पंचायत की कुल आबादी लगभग पांच हजार है. इसके कुल 9 वार्ड हैं. कुल मतदाता लगभग साढ़े तीन हजार है. प्रमुख गांवों में केशरगढ़, सदरियाडीह, बिराजपुर, सिदपोकी, धोबाटांड, बेलियाटांड आदि शामिल है.

रिपोर्ट : शंकर प्रसाद साव, बाघमारा, धनबाद.

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