नशे की गिरफ्त में युवा, जिले में मनोरोगियों की संख्या डेढ़ गुना बढ़ी

जमशेदपुर में नशे के कारण मनोरोगियों की संख्या में चिंताजनक वृद्धि हुई है, खासकर 15-35 वर्ष के युवाओं में। मल्टीपल नशा और ड्रग्स के सेवन से मानसिक संतुलन बिगड़ रहा है.

जमशेदपुर : जिले में नशे का कारोबार खतरनाक रूप ले चुका है. यह केवल युवाओं के भविष्य को ही बर्बाद नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से बीमार भी बना रहा है. स्वास्थ्य विभाग और मनोरोग विशेषज्ञों के ताजा आंकड़े चौंकाने वाले हैं. जिले में बीते कुछ समय के भीतर नशे की लत के कारण मनोरोगियों की संख्या में डेढ़ गुना तक की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है. एमजीएम व सदर अस्पताल में चल रहे मनोरोग विभाग के ओपीडी में प्रतिदिन अगर 100 मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं, तो उनमें 60 प्रतिशत मरीज नशे के कारण मनोरोग के शिकार मिल रहे हैं. इनमें अधिकांश की उम्र 15 से 35 वर्ष के बीच है.

मल्टीपल नशा करने से हो रहे मनोरोगी

एमजीएम अस्पताल के मनोरोग विभाग के एचओडी डॉ केशव ने बताया - इस समय अस्पताल के ओपीडी में सबसे ज्यादा मल्टीपल नशा करने वाले मरीज आ रहे हैं. 10 में तीन से चार मरीज मल्टीपल नशा के शिकार हैं, जो ड्रग्स, गांजा, भांग सभी खाते हैं. इतना ही नहीं इन नशा के साथ शराब भी पीते हैं. डॉक्टरों के अनुसार, वैसे युवा डिप्रेशन, घबराहट, अत्यधिक आक्रामकता, अनिद्रा और हेलुसिनेशन (काल्पनिक चीजें दिखना या सुनना) जैसी गंभीर मानसिक समस्याओं की शिकायत लेकर अस्पताल के ओपीडी में आ रहे हैं. पूछताछ करने पर उन लोगों ने बताया कि नशे के लिए स्मैक, गांजा, भांग, ड्रग्स के अलावा प्रतिबंधित कफ सिरप का भी इस्तेमाल कर रहे हैं.

ड्रग्स की लत से बिगड़ा मानसिक संतुलन

शहर के मकदमपुर निवासी एक 22 वर्षीय छात्र ने बताया - शुरुआत में दोस्तों के साथ मौज-मस्ती में गुटखा व सिगरेट की आदत लगी. धीरे-धीरे खुराक बढ़ती गयी. इसके बाद दोस्तों के चक्कर में ड्रग्स की लत लग गयी. उसके लिए पैसे नहीं मिलने पर वह घर में तोड़-फोड़, लड़ाई करने लगा. डॉक्टरों ने जांच करने पर बताया कि उसे गंभीर डिप्रेशन और 'पैरानॉया' (वहम की बीमारी) है. एमजीएम अस्पताल के मनोरोग विभाग के ओपीडी में उसका इलाज चल रहा है.

नशा के लिए जो चीज मिलती है, उसे ले लेता है

भुइयांडीह निवासी 30 वर्षीय एक युवक ने बताया कि पिछले तीन सालों से अत्यधिक गांजे का सेवन कर रहा था. अभी नशा के लिए जो भी चीज मिलती है, उसे ले लेता है. इसमें गांजा, ड्रग्स, भांग के अलावे अगर पैसा नहीं रहता है, तो प्रतिबंधित कफ सिरप भी लेता है. इस वजह से वह बिना वजह डरने, अजीब आवाजें सुनायी देने और अत्यधिक आक्रामकता का शिकार हो गया है. अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच कर बताया कि वह 'साइकोसिस' का शिकार हो चुका है.

क्या कहते हैं डॉक्टर

एमजीएम अस्पताल के मनोरोग विभाग के एचओडी डॉ केशव ने बताया - नशा सीधे दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर को प्रभावित करता है. नशे का अत्यधिक सेवन से पैनिक अटैक, डिप्रेशन और सिजोफ्रेनिया जैसी बीमारियां तेजी से पनप रही हैं. समय पर इलाज और काउंसेलिंग ही इसका एकमात्र बचाव है. नशा केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि दिमाग को हमेशा के लिए अपंग बना देता है. यदि परिजनों को बच्चों के बर्ताव में चिड़चिड़ापन, नींद न आना या एकांतप्रियता दिखे, तो इसे छिपाने के बजाय तुरंत मनोचिकित्सक से काउंसेलिंग करायें.


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By Chandra Shekhar

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