सोनारी एयरपोर्ट का ‘टेकऑफ’ प्लान तैयार, सड़क से रनवे तक जानें क्या किया गया है बदलाव...

जमशेदपुर के सोनारी एयरपोर्ट पर बड़ा बदलाव हो रहा है. सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए विस्तार कार्य तेजी से चल रहा है. उम्मीद है कि दुर्गापूजा से पहले यहां छोटे विमानों की सेवा फिर से शुरू हो जाएगी.

जमशेदपुर : जमशेदपुर के लोगों के लिए हवाई सफर से जुड़ी एक बड़ी उम्मीद फिर जागी है. सोनारी एयरपोर्ट के विस्तार का काम अब अंतिम चरण में पहुंच गया है. कदमा की ओर वैकल्पिक सड़क तैयार होकर चालू हो चुकी है, जबकि सोनारी की तरफ चहारदीवारी विस्तार का काम तेजी से चल रहा है. नयी सड़क का निर्माण भी जारी है. अगर काम तय समय के मुताबिक पूरा हुआ, तो दुर्गापूजा से पहले इस रास्ते से लोगों की आवाजाही शुरू हो सकती है. एयरपोर्ट विस्तार के बाद शहर से छोटे विमानों की सेवा दोबारा शुरू होने की संभावना भी जतायी जा रही है.

सुरक्षा मानकों को किया जा रहा पूरा

एयरपोर्ट के आसपास चल रहे इस बदलाव का मकसद सिर्फ रास्ता बदलना नहीं, बल्कि विमान परिचालन के लिए जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा करना है. इंजीनियरों, कर्मचारियों और अधिकारियों की टीम लगातार निर्माण और तकनीकी काम में जुटी हुई है.

सोनारी एयरपोर्ट पर क्यों हो रहा है इतना बड़ा बदलाव?

सोनारी एयरपोर्ट का रनवे पुरानी चहारदीवारी के काफी करीब है और उसके दोनों ओर सड़कें गुजरती हैं. सुरक्षा के लिहाज से यह स्थिति डीजीसीए के मानकों के अनुरूप नहीं मानी गयी. इसी वजह से एयरपोर्ट की सीमा और आसपास के रास्तों में बदलाव किया जा रहा है.

डीजीसीए की ओर से चेतावनी दी गयी थी कि यदि जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं किया गया, तो एयरपोर्ट का लाइसेंस रद्द हो सकता है और यहां से विमानों का परिचालन बंद करना पड़ सकता है. खास बात यह है कि रनवे की मूल लंबाई बढ़ाने के बजाय उसके आसपास का सुरक्षा क्षेत्र और सड़क व्यवस्था बदली जा रही है. सोनारी से सर्किट हाउस और बिष्टुपुर की ओर जाने वाली सड़क को भी हल्का कर्व दिया गया है.

कदमा की ओर सड़क तैयार, सोनारी की तरफ काम तेज

एयरपोर्ट के विस्तार के दौरान कदमा की ओर वैकल्पिक सड़क का काम पूरा हो चुका है और रास्ता चालू कर दिया गया है. सोनारी की ओर चहारदीवारी विस्तार के साथ वैकल्पिक सड़क तैयार की जा रही है. सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किये जा रहे इस रास्ते पर काम पूरा होने के बाद दुर्गापूजा से पहले लोगों की आवाजाही शुरू होने की उम्मीद है. इससे एयरपोर्ट के आसपास यातायात व्यवस्था में भी बदलाव आयेगा.

चर्च और मैदान पर नहीं पड़ेगा असर

एयरपोर्ट विस्तार को लेकर आसपास के लोगों के मन में चर्च और मैदान को लेकर भी सवाल रहे हैं. हालांकि, विस्तार के कारण मैदान का जितना हिस्सा प्रभावित होगा, उतनी ही जमीन बायीं ओर से जोड़कर मैदान को दिया जायेगा. इससे मैदान की लंबाई-चौड़ाई पहले की तरह बरकरार रखने की योजना है. यानी एयरपोर्ट की सुरक्षा बढ़ेगी, लेकिन आसपास की महत्वपूर्ण सार्वजनिक जगहों को यथासंभव पहले जैसा ही रखने की कोशिश की जा रही है.

कंपनी को पड़ता था 10 हजार का खर्च

सोनारी एयरपोर्ट से पहले एयर डेक्कन, एमडीएलआर और इंडिया वन एयर जैसी कंपनियों ने अलग-अलग समय में उड़ान सेवा शुरू की. लेकिन कम यात्रियों और अधिक परिचालन लागत के कारण सेवाएं लंबे समय तक नहीं चल सकीं. इंडिया वन एयर नौ सीट वाले विमान से कोलकाता और भुवनेश्वर के लिए उड़ान संचालित करती थी.

कंपनी के सीइओ प्रेम गर्ग के मुताबिक, एक सीट की परिचालन लागत करीब 10 हजार रुपये आती थी. उड़ान योजना की सब्सिडी के कारण यात्रियों को टिकट करीब तीन हजार रुपये में उपलब्ध कराया जाता था.

केंद्र की ओर से उड़ान योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी बंद होने के बाद कंपनी के सामने हर सीट पर भारी घाटा उठाने की स्थिति बनी.

छोटे विमान ही क्यों?

बड़े विमान के लिए रनवे छोटा सोनारी एयरपोर्ट की एक बड़ी सीमा इसका छोटा रनवे है. यहां एटीआर-72 या एयरबस जैसे 70 से 180 सीट वाले बड़े यात्री विमानों का संचालन संभव नहीं है. यही वजह है कि जमशेदपुर के यात्रियों को बड़े विमानों से सफर करने के लिए रांची या कोलकाता जाना पड़ता है. शहर में उद्योग, कारोबार और शिक्षा का बड़ा आधार होने के बावजूद सीधी हवाई कनेक्टिविटी की कमी लंबे समय से महसूस की जाती रही है.

टाटा स्टील तलाश रही फिर उड़ान शुरू करने की संभावना

सोनारी एयरपोर्ट से दोबारा कोलकाता और भुवनेश्वर जैसे शहरों के लिए छोटे विमानों की सेवा शुरू कराने की कोशिश की जा रही है. टाटा स्टील की ओर से विमानन कंपनियों को एयरपोर्ट की सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गयी है. टाटा स्टील के प्रवक्ता राजेश राजन के अनुसार, कोलकाता और भुवनेश्वर की उड़ानें बंद हो चुकी हैं. कंपनी की ओर से विमानन कंपनियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं, ताकि जनहित में हवाई सेवा फिर शुरू हो सके.

1940 में बना था सोनारी एयरपोर्ट, अब नये दौर की तैयारी

सोनारी एयरपोर्ट की स्थापना वर्ष 1940 में हुई थी. करीब 25 एकड़ में फैले इस एयरपोर्ट की चहारदीवारी का विस्तार किया जा रहा है. विस्तार के बाद इसका क्षेत्रफल करीब 35 एकड़ होने की संभावना जतायी जा रही है, हालांकि आधिकारिक तौर पर विस्तारित क्षेत्रफल की जानकारी सामने नहीं आयी है. यह टाटा स्टील की निजी संपत्ति है. अब डीजीसीए के सुरक्षा मानकों के अनुरूप इसमें जरूरी बदलाव किये जा रहे हैं. उम्मीद है कि इन बदलावों के बाद भविष्य में यहां से नयी हवाई सेवाओं की राह खुलेगी.

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लेखक के बारे में

By ब्रजेश सिंह

ब्रजेश सिंह. प्रभात खबर से कई सालों से जुड़े हुए है. 29 सालों का पत्रकारिता का अनुभव है. औद्योगिक, ट्रेड यूनियन, क्राइम, प्रशासनिक, सरकार, राजनीति के जानकार है.

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