जमशेदपुर: 60 साल पहले शास्त्रीनगर स्थित मसजिद को झोपड़ा मसजिद के नाम से जाना जाता था. वक्त के साथ मसजिद से जुड़े लोगों ने इसके सौंदर्यीकरण व सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया. वर्तमान में फारुकी मसजिद के नाम से पहचान बना चुका झोपड़ा मसजिद वातानाकूलित हो गया है.
यहां तारावीह की नमाज के दौरान सैकड़ों लोग जुटते हैं. नमाजियों और कुरान की तिलावत करनेवालों को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो, इसके लिए कमेटी ने 20 केवीए का जेनरेटर भी लगाया है. आपात स्थिति में यह ऑटोमेटिक ऑन और बत्ती आ जाने पर ऑफ हो जाता है.
‘‘ मसजिद कमेटी के अध्यक्ष हाफिज असरार अहमद ने बताया कि मसजिद को और बेहतर स्वरूप प्रदान करने के लिए दो मिनार यहां स्थापित किया जाना है. निर्माण कार्य को कमेटी ने मंजूरी दे दी है. ईद के बाद इनका निर्माण कार्य शुरू कर दिया जायेगा. मिनार का नक्शा भी मंगा लिया गया है. हाफिज असरार अहमद ने बताया कि मसजिद कमेटी के पास जगह की काफी किल्लत है, जिसके कारण वे अपना मदरसा नहीं चला पा रहे हैं. मसजिद को यदि जमीन उपलब्ध हो जाये तो बेहतर स्थान बनाने का काम किया जायेगा.
हाफिज असरार अहमद
अध्यक्ष, फारुकी मसजिद, शास्त्रीनगर
रोजा का फल अल्लाह खुद देंगे
रोजेदार को रोजा का फल अल्लाह खुद देंगे. इसका अज्र-बदल अल्लाह खुद हैं. इसलिए जो रोजा रखेगा, उसे इसका फल हर हाल में मिलेगा. रोजेदार अल्लाह को याद करें और रोजा रखें. उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. रमजान का मतलब साफ है रहमत, मगफिरत और दोजख से निजात का महीना. जिसने इन शब्दों को समझ लिया, उन्हें जिंदगी में कभी किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी. रमजान के दौरान सेहरी और इफ्तार सुन्नत है.
इमाम हाफिज मौलाना इम्तियाज अहमद मिसबाही
फारुकी मसजिद, शास्त्रीनगर
