घंटे भर पड़ा रहा शव, रुकी रही ट्रेन

जमशेदपुर: रेलवे लाइन से शव उठाने की कशमकश के बीच शनिवार की रात करीब एक घंटे तक 12802 डाउन पुरी-नई दिल्ली पुरुषोत्तम एक्सप्रेस टाटानगर स्टेशन के आउटर पर खड़ी रही. इस क्रम में यात्रियों व ट्रेन चालक ने स्टेशन प्रबंधक और रेल पुलिस को शव होने की जानकारी दी, लेकिन रेल पुलिस की ओर से […]

जमशेदपुर: रेलवे लाइन से शव उठाने की कशमकश के बीच शनिवार की रात करीब एक घंटे तक 12802 डाउन पुरी-नई दिल्ली पुरुषोत्तम एक्सप्रेस टाटानगर स्टेशन के आउटर पर खड़ी रही. इस क्रम में यात्रियों व ट्रेन चालक ने स्टेशन प्रबंधक और रेल पुलिस को शव होने की जानकारी दी, लेकिन रेल पुलिस की ओर से कोई पहल नहीं की गयी. यात्रियों के काफी हंगामा मचाने के बाद रेल पुलिस ने लगभग 50 मिनट बाद शव को रेलवे लाइन से हटाया इसके बाद पुरुषोत्तम एक्सप्रेस को खड़गपुर के लिए रवाना किया गया. घटना शनिवार रात 10.10 बजे की है.

दरअसल टाटानगर से रवाना हुई पुरुषोत्तम एक्सप्रेस के लोको रेलवे क्रासिंग पार करते हुए चालक को पटरी पर लेटा हुआ एक व्यक्ति नजर आया. उस समय ट्रेन की रफ्तार काफी कम थी, लिहाजा चालक ने तत्काल ट्रेन रोक दी.

इसके बाद चालक ने स्टेशन प्रबंधक को इसकी सूचना दी और फिर रेलवे लाइन से शव उठाने के लिए रेल पुलिस को मेमो दिया गया. लेकिन रात होने और सफाई कर्मी के नहीं होने से रेल पुलिस भी चुप्पी साधे रही. उधर रेलवे लाइन से (शव को हटाने) यानि ट्रैक क्लीयर करने में विलंब होने के कारण पुरुषोत्तम एक्सप्रेस गोलपहाड़ी आउटर पर खड़ी रही. बाद में हंगामे और भारी दबाव के बीच रेल पुलिस ने सफाईकर्मी का इंतजाम कर शव को रेलवे ट्रेक से हटाया, इसके बाद पुरुषोत्तम एक्सप्रेस को लगभग 11.10 बजे आगे की ओर रवाना किया गया.

हत्या व दुर्घटना के बीच उलझी मौत
रेलवे ट्रैक पर मिला शव किसी यात्री का है अथवा हत्या कर शव साक्ष्य छुपाने की नीयत से रेलवे ट्रैक पर रखा गया, यह बड़ा सवाल रेल पुलिस के सामने आ गया है. बताया जा रहा है कि इससे पूर्व उत्कल एक्सप्रेस उसी मार्ग से गुजरी थी. लेकिन अधेड़ का शव किसी यात्री का प्रतीत नहीं होता. इस तथ्य की पुष्टि रेल अधिकारी भी कर रहे है. इससे यह संदेह भी प्रबल हो गया है कि हत्या कर शव को रेल पटरी पर रखा गया हो. अगर ट्रेन शव के ऊपर से गुजर जाती तो मामले को सुलझना काफी जटिल हो जाता.

क्यों हुई इतनी देरी!
रेलवे ट्रैक से शव को उठाने के सवाल पर रेल प्रशासन और पुलिस आमने-सामने है. रेल अधिकारियों का कहना है कि रेल पुलिस को शव उठाने के लिए एक मुश्त राशि दी जाती है जबकि रेल पुलिस का तर्क है कि जितनी राशि मिलती है उतने में शव का निष्पादन संभव नहीं. देर रात सफाईकर्मी नहीं मिलने के कारण भी रेल पुलिस को शव उठाने में विलंब हुआ.

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