रांची/जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल में चल रहे बर्न यूनिट की नयी बिल्डिंग राज्य सरकार ने एक करोड़ की लागत से वर्ष भर पहले ही बनायी थी. अभी तक उस बिल्डिंग में बर्न यूनियन सही तरीके से चालू भी नहीं किया गया है. 10 बेड की पुरानी बिल्डिंग में जगह नहीं रहने के कारण नयी बिल्डिंग में मरीजों को रखा गया है.
वहीं दूसरी ओर मार्च 2018 में केंद्र सरकार से बर्न यूनिट के नाम पर फिर से एमओयू कर लिया है. केंद्रीय सहायता से बनने वाली नयी यूनिट की लागत तीन करोड़ होगी. स्वास्थ्य विभाग द्वारा चार जिलों (खूंटी, लातेहार, गढ़वा व गिरिडीह) को छोड़ सभी जिला अस्पतालों तथा पीएमसीएच, धनबाद में बर्न यूनिट बना दिया है.
एमजीएम में बनी बर्न यूनिट कॉलेज व अस्पताल के उपकरणों की सहायता से संचालित की जा रही है. एमजीएम की बर्न यूनिट के लिए वित्तीय वर्ष 2014 से लेकर 2016-17 तक राज्य योजना मद से 1.02 करोड़ रु दिये गये. इससे पहले सात मार्च 2018 को एमअोयू होने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने रिम्स, रांची व एमजीएम जमशेदपुर की बर्न यूनिट को छह जुलाई 2018 को निरस्त कर दिया था.
इसका कारण बर्न यूनिट के फॉरमेट के बजाय ट्रॉमा सेंटर के फॉरमेट पर सचिव से हस्ताक्षर करवाना था. इसके बाद भारत सरकार ने एक मई को एमओयू सुधार कर यथाशीघ्र भेजने का निर्देश दिया. पर सुधार प्रक्रिया में चार माह से अधिक लग जाने तथा इसे 10 सितंबर को भारत सरकार को भेजने से पहले ही पीएमअो ने छह जुलाई को रिम्स तथा एमजीएम की बर्न यूनिट स्थगित करने का निर्णय ले लिया. इधर, 28 नवंबर को जानकारी मिली है कि केंद्र सरकार यह योजना फिर से रिवाइव कर रही है.
सदर अस्पताल की बर्न यूनिट में चल रहा एएनएम स्कूल
स्वास्थ्य विभाग द्वारा सदर अस्पताल में इलाज कराने आने वाले बर्न के मरीजों का सही से इलाज हो सके इसके लिए 89.88 लाख की लागत से बर्न यूनिट बनायी गयी. उपकरण व डॉक्टरों के अभाव में इसे अब तक चालू नहीं किया जा सका. बर्न यूनिट में एएनएम स्कूल चलाया जा रहा है.
