जमशेदपुर: केबुल कंपनी के बीडर के रूप में अपना नाम लेने वाले पेगासस कंपनी के प्रस्ताव पर मंगलवार को बायफर (बीआइएफआर) में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान पेगासस कंपनी की ओर से कहा गया कि चूंकि वे लोग बिडिंग में सफलतम कंपनी में शामिल नहीं है, इस कारण अपना प्रस्ताव वापस लेना चाहते हैं. इसके लिए जमा कराये गये 25 करोड़ रुपये को वापस करने की अपील की गयी.
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ओर से ली गयी प्रतिभूति राशि को वापस करने की मांग की गयी. इस पर बायफर ने कहा कि पेगासस कंपनी की ओर से विभिन्न अदालतों में केबुल कंपनी को लेकर कई तरह के केस दायर किये गये हैं. लिहाजा, पहले चार सप्ताह में सारे केस को वापस लें, फिर पैसे वापस किये जायेंगे. बायफर ने यह माना कि एक तरफ कोई कंपनी केस चलाती रहेगी तो दूसरी ओर अपनी प्रतिभूति राशि भी वापस नहीं ले सकती है. चार सप्ताह के बाद पेगासस को कहा गया है कि वे लोग केस वापस लेकर फिर से बायफर को सूचित करें. इसके बाद ही कोई सुनवाई हो सकती है.
दिल्ली हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस के नाम पोस्टकार्ड
केबुल कंपनी को चालू कराने को लेकर केबुल बचाओ संघर्ष समिति की ओर से कर्मचारियों और उनके परिवार के लोगों द्वारा कंपनी को फिर से चालू कराने के लिए दिल्ली हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस के नाम पोस्टकार्ड भेजने की मांग की है. इस अभियान के तहत करीब एक हजार पोस्टकार्ड भेजे जा रहे हैं. मंगलवार को इस अभियान की शुरुआत की गयी. इसमें रवींद्र मिश्र, रामनरेश साहू, संतलाल, राजेश झा, शिवशंकर तिवारी समेत अन्य लोग शामिल थे.
