एनएच-33 पर मंत्री सरयू राय ने कहा
जमशेदपुर : टाटा-रांची रोड (एनएच-33) का निर्माण पूरा नहीं हो पाने को लेकर खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने अफसोस और शर्मिंदगी जताते हुए कहा है कि उन्होंने विपक्ष में रहते हुए मुख्यमंत्री रघुवर के साथ मिलकर एनएचएआइ दफ्तर का घेराव तक किया था.
गुरुवार को बिष्टुपुर स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘टाटा-रांची एनएच निर्माण को लेकर मैंने व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने विपक्ष में रहते हुए एनएचएआइ के रांची स्थित दफ्तर का घेराव किया था.
वहां हंगामा व तोड़फोड़ भी हो गयी थी. मामले में अभी कुछ माह पूर्व ही हमलोग बरी हुए हैं. आज सरकार में रहकर भी हम लोग एनएच को नहीं बनवा पाये, यह हमारे लिए शर्मिंदगी की स्थिति है. खास तौर पर मैं तो रांची से जमशेदपुर सप्ताह में दो बार आता-जाता हूं तो अफसोस, पीड़ा और शर्मिंदगी खुद में झेलता हूं.’ श्री राय ने आगे कहा कि अंततः न्यायपालिका को इसमें हस्तक्षेप करते हुए सीबीआइ जांच का आदेश देना पड़ा.
उन्होंने आश्वस्त किया कि सीबीआइ की जांच में एनएचएआइ, नहीं बनाने वाली एजेंसी और नहीं बनने के बावजूद बैंकों द्वारा लगातार लोन दिया जाने वाले कतिपय लोग भी पकड़े जायेंगे क्योंकि ये सभी जांच के दायरे में आ गये हैं, जबकि कुछ दिनों पूर्व तक ये लोग उच्च न्यायालय के आदेश तक को भी गंभीरता से नहीं ले रहे थे.
आज मिल सकती है भूख से मौत मामले की जांच रिपोर्ट : श्री राय ने कहा कि रामगढ़ में भूख से मौत के आरोप लग रहे हैं, उसकी जांच का आदेश उपायुक्त को दिया है. संभवतः कल तक उन्हें मिल जाये. उसके बाद ही आगे की कार्रवाई संभव है. वैसे यह सीधे तौर लापरवाही का मामला है. पत्रकारों द्वारा पूछे गये सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एक सबर परिवार होने के बावजूद इतने दिन तक राशन कार्ड न बनना, मौत के बाद पोस्टमॉर्टम नहीं कराना तथा समुचित चिकित्सा नहीं मिलना लापरवाही बरतने के संकेत है. हालांकि, उक्त व्यक्ति को जॉन्डिस होने की बात सामने आ रही है, लेकिन मौत की वजह यह है या नहीं, जांच रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा.
आधा कार्य भी नहीं हुआ : श्री राय ने कहा कि इस एवज में जितनी राशि की निकासी हुई, उसका आधा भी कार्य नहीं हो पाया है, यह बेहद चिंताजनक है. इसमें बैंक भी कम दोषी नहीं है. कार्य नहीं होने के बावजूद बैंक पैसा देता रहा और वह रकम अन्यत्र डाइवर्ट होता रहा. श्री राय ने बताया कि गत दिनों जब वह हैदराबाद गये थे तो ठेका कंपनी के मालिक तेलगू देशम पार्टी के पूर्व सांसद से मिलकर इस पर बात की थी. बावजूद इसमें कोई सुधार नहीं आया.
