उत्तरी छोटानागपुर के सात जिला पशुपालन मुख्यालय में गलाघोंटू व लंगड़ा बुखार की वैक्सीन उपलब्ध

मानसून में पालतू जानवर जैसे गाय, बैल, भैंस, भेड़, बकरी, सूकर एवं अन्य में दो जानलेवा बीमारी गलाघोंटू एवं लंगड़ा बुखार पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है. इससे जानवरों का बचाव करने एवं किसानों को जागरूक करने के लिए पशुपालन विभाग ने अभियान चलाया है. इसके लिए विभाग में नि:शुल्क दवा (वैक्सीन) उपलब्ध है.

By Prabhat Khabar Digital Desk | August 8, 2022 8:52 AM

Hazaribagh News: मानसून के चालू महीने में अधिकांश पालतू जानवर जैसे गाय, बैल, भैंस, भेड़, बकरी, सूकर एवं अन्य में दो जानलेवा बीमारी गलाघोंटू एवं लंगड़ा बुखार पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है. इससे जानवरों का बचाव करने एवं किसानों को जागरूक करने के लिए पशुपालन विभाग ने अभियान चलाया है. इसके लिए विभाग में नि:शुल्क दवा (वैक्सीन) उपलब्ध है. किसान इसका लाभ ले सकते हैं. समय पर जानवरों को दवा देकर जानलेवा बीमारी से बचा सकते हैं.

उत्तरी छोटानागपुर के जिलों में उपलब्ध है टीका

इस संबंध में क्षेत्रीय निदेशक पशुपालन डॉ दारा शिकोह ने विशेष बातचीत में बताया है कि पालतू जानवरों में दो गंभीर बीमारी गलाघोंटू एवं लंगड़ा बुखार से बचाव के लिए उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के सभी सात जिले चतरा, कोडरमा, गिरिडीह, हजारीबाग, बोकारो, धनबाद एवं रामगढ़ के जिला पशुपालन कार्यालय में एचएसबीक्यू वैक्सीन को बड़ी मात्रा में उपलब्ध कराया गया है. वहीं सभी जिला पशुपालन पदाधिकारियों को इसके लिए कई आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये हैं. इसके बाद भी वैक्सीन की कमी या दोनों गंभीर बीमारी से किसानों के पालतू जानवरों की मौत होती है तो इसके लिए जिला पशुपालन पदाधिकारी चिन्हित होंगे.

सरकार एवं विभाग दोनों गंभीर

उन्होंने कहा कि मानसून के महीने में अधिकांश पालतू जानवरों में गलाघोंटू एवं लंगड़ा बुखार जैसे दो गंभीर बीमारी होने का खतरा बना रहता है. वैक्सीन लगने के बाद जानवरों में बीमारी पर काबू पाया जा सकता है. इसके लिए सरकार एवं विभाग दोनों गंभीर है. समय पर वैक्सीन लगाकर किसान अपने जानवर को सुरक्षित रख सकते हैं. जब उनके पालतू जानवर सुरक्षित रहेंगे तो इससे किसान आर्थिक नुकसान से बचेंगे. बता दें कि उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के सभी जिले में अधिकांश किसानों की आय का साधन उनका पालतू जानवर पर निर्भर है. कई ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी एवं सूकर पालन कर किसान अपना एवं अपने परिवार का जीविकापार्जन करने में जुटे हैं.

रिपोर्ट : आरिफ, हजारीबाग

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